न्यायालय अपर सत्र न्यायाधीश/एफसीटी पीएन श्रीवास्तव ने दहेज हत्या के आरोपी पति, सास और ससुर को दोष सिद्ध पाते हुए सजा सुनाई है। जिसमें पति को आजीवन कारावास तथा सास, ससुर को दस दस वर्ष की कैद और जुर्माने से भी दंडित किया गया है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार जनपद इलाहाबाद के थाना मांडा क्षेत्र दोहथा गांव निवासी गुलशेर अहमद ने अपनी पुत्री रईसा बेगम का निकाह 17 जून 2005 को अभियुक्त मोहययुद्दीन पुत्र निजामुद्दीन निवासी हथिया बांध थाना लालगंज के साथ किया था।
शादी के बाद से ही रंगीन टीवी तथा मोटर साइकल की मांग को लेकर रईसा को प्रताड़ित किया जाता था। आए दिन उसे मारा पीटा जाता था।
24 अप्रैल 2009 को पति समेत सास ससुर ने रईसा को मारपीट फांसी पर लटका दिया था। गांव के प्रधान द्वारा जानकारी देने पर मृतका के पिता गुलशेर अहमद निवासी दोहथा थाना मांडा इलाहाबाद ने लालगंज थाने में तहरीर देकर पति, सास ससुर के खिलाफ धारा 498ए, 304बी तथा 3/4 डीपी एक्ट का मुकदमा पंजीकृत कराया।
जिसकी पुलिस ने विवेचना कर आरोप पत्र न्यायालय में दिया था। अभियोजन की ओर से वरिष्ठ शासकीय अधिवक्ता रमेंद्र कुमार शुक्ल व सहायक शासकीय अधिवक्ता फौजदारी रामेश्वर सिंह ने छह गवाह परीक्षित कराए।
जिसकी सुनवाई गुरुवार को न्यायालय में हुई। अधिवक्ताओं की दलील पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्य तथा गवाहों के बयान के आधार पर न्यायालय ने पति मोहयुद्दीन को आजीवन कारावास तथा छह हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया।
वहीं अभियुक्त सास नसीरून व ससुर निजामुद्दीन को दोष सिद्ध पाते हुए दस दस वर्ष की कैद व प्रत्येक को छह हजार रुपये के अर्थदंड से भी दंडित कर जेल भेज दिया।