मां विंध्यवासिनी के आशीर्वाद से मैं भारत की तरफ से ओलंपिक में भाग लेकर गोल्ड मेडल जीतकर देश का गौरव बढ़ाना चाहती हूं। विंध्यधाम में शीश झुकाने के बाद पूरा विश्वास हो गया कि मुझे मेरी मंजिल जरूर मिलेगी। यह बातें शनिवार को विंध्याचल पहुंची जल परी श्रद्धा शुक्ला ने प्रेसवार्ता के दौरान कही।
कानपुर से वाराणसी तक गंगा की यात्रा के क्रम में श्रद्धा शुक्ला शुक्रवार की शाम साढ़े सात बजे विंध्याचल के पक्काघाट पहुंची, जहां जल परी का स्वागत करने के लिए रेला उमड़ पड़ा। पक्काघाट से लेकर विंध्याचल मंदिर तक उमड़ी हजाराें की भीड़ श्रद्धा को माला पहनाने के लिए आतुर थी। श्रद्धा मां विंध्यवासिनी धाम में पहुंचकर पूजन-अर्चन किया।
उसके बाद निर्मला शुक्ला के आवास पर प्रेसवार्ता में कहा कि जब मैं मात्र ढाई वर्ष की थी तो मेरे दादा जी मुझे तैरना सिखाते थे, तभी से तैराकी के प्रति मेरे मन में रूझान हो गया। बताया कि वह रविवार की सुबह सात बजे निकलेगी और वाराणसी निर्धारित समय से पहुंच जाएगी। उनके पिता ललित शुक्ल, मां वंदना शुक्ला, दादा आदि उपस्थित रहे। जल परी विंध्याचल में रात्रि विश्राम निर्मला शुक्ल के आवास पर करेगी और सात बजे मंजिल की ओर बढ़ेगी।