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Mirzapur News: कृषि और ग्रामीण आजीविका सृजन में रेशम उद्योग का महत्व

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मिर्जापुर। बीएचयू के बरकछा स्थित राजीव गांधी दक्षिणी परिसर में आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण रेशम कीटों की विविधता व संवर्धन विषय पर बुधवार को तीन दिवसीय प्रौद्योगिकी उन्मुखीकरण कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। आयोजन केंद्रीय रेशम बोर्ड, ईआरआई अनुसंधान व विस्तार केंद्र फतेहपुर द्वारा वस्त्र मंत्रालय के अंतर्गत क्षमता निर्माण व प्रशिक्षण पहल के तहत किया गया। कार्यक्रम में रेशम कीटों की विविधता, उनके संवर्धन एवं आर्थिक महत्व के साथ-साथ रेशम उत्पादन में हाल के तकनीकी विकासों पर विशेष बल दिया जा रहा है। डॉ. कुलदीप बौद्ध ने सतत कृषि और ग्रामीण आजीविका सृजन में रेशम उद्योग के महत्व पर प्रकाश डाला। केंद्रीय रेशम बोर्ड के वैज्ञानिक डा. डीके जिग्यासु ने प्रशिक्षण के उद्देश्यों और अपेक्षित परिणामों को रेखांकित किया गया। उन्होंने भारत में रेशम उत्पादन की वर्तमान स्थिति का भी अवलोकन प्रस्तुत किया। आचार्य प्रभारी प्रो. बीएमएनकुमार ने कक्षा शिक्षण को क्षेत्र आधारित व कौशल उन्मुख प्रशिक्षण के साथ जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया। बताया कि विशेषकर पूर्वी उत्तर प्रदेश में रेशम उद्योग रोजगार सृजन, उद्यमिता व समावेशी ग्रामीण विकास की अपार संभावनाएं है। छात्रों से सक्रिय सहभागिता, व्यावहारिक अनुभव प्राप्त करने व रेशम उद्योग में कैरियर के अवसर तलाशने का आह्वान किया। बताया कार्यक्रम 30 जनवरी तक चलेगा। इसमें शहतूत, एरी, तसर व मूंगा रेशम उत्पादन पर विशेषज्ञ व्याख्यान, प्रायोगिक प्रदर्शन व संवादात्मक सत्र आयोजित किए जाएंगे। इस अवसर पर डाॅ. राजेश कुमार, डॉ. आलोक कुमार सिंह, डाॅ. सविता देवांगन, डाॅ. रजनी श्रीवास्तव, प्रो. अचिन्त्य सिंघल, डाॅ. मनोज सिंह, डाॅ. रविंद्र प्रसाद, डाॅ. मनोज कुमार मिश्रा आदि रहे।
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