रेलवे ने जब से इंटरनेट के माध्यम से निजी कंपनियों को तत्काल समेत आरक्षण टिकट निकालने की अनुमति दी है तब से यात्रियों को तत्काल टिकट नहीं मिल पा रहा है।
नजीता वह दलालों या निजी दूकानदारों द्वारा निकाले जा रहे टिकट के निर्धारित मूल्य से चार गुना अधिक पैसा देकर टिकट खरीदने को मजबूर हैं। इतना ही नहीं रेल कर्मियों की मिलीभगत से दलाल तत्काल टिकट पर हावी हैं।
रेलवे द्वारा यात्रियों को लगातार बेहतर सुविधा उपलब्ध कराने का दावा छलावा साबित हो रहा है। गलत नीतियों के चलते यात्रियों को सुविधा कम और परेशानी व क्षति अधिक उठानी पड़ रही है।
इमामबाड़ा निवासी उत्तम कुमार गुप्ता का कहना है कि रेलवे द्वारा यात्रियों को सुविधा प्रदान करने के लिए निजी कंपनी को जो आरक्षण टिकट निकालने की परमिशन दिया है इससे यात्रियों को सुविधा मिलने की बजाय असुविधा ही हो रही है।
शुक्लहा निवासी आशीष गुप्ता का कहना है कि जब से निजी संस्थाए तत्काल समेत अन्य टिकट निकालने लगी हैं तब से रेलवे के आरक्षण काउंटर पर काफी कम टिकट निकलने लगा है। वहां जाने पर कर्मचारी हमेशा सरवर डाउन होने की बात करते हुए टिकट निकालने से इंकार कर देते हैं।
संगमोहाल निवासी जसबीर सिंह का कहना कि रेलवे के आरक्षण काउंटर से मुंबई, दिल्ली समेत अन्य स्थानों का टिकट लेने पर निर्धारित पैसा का वहन करना पड़ा है लेकिन निजी दूकानों से या दलालों से लेने पर चार गुना देना पड़ता है।
सिटी कोतवाली के समीप के निवासी संतोष ऊमर ने कहा कि आरक्षण काउंटरों पर दलालों का कब्जा हो गया है। पिछले कुछ माह पहले पुलिस ने कई दलालों को पकड़ कर जेल भेजा था जिससे कालाबाजारी में कमी आई थी।
इस समय एक बार फिर दलाल सक्रिय हो गए हैं। जिससे यात्रियों को टिकट लेने में परेशानी हो रही है।