मिर्जापुर। जिले में आरओ वाटर के नाम पर पानी बेचने का बाजार गर्म है। लोगों को शुद्ध पेयजल मिल रहा है या नहीं, यह तो जांच का विषय है लेकिन अवैध आरओ प्लांट के जरिये प्रचुर मात्रा में भूजल का दोहन किया जा रहा है। गर्मी में जहां आरओ वाटर का अवैध कारोबार कई गुना बढ़ जाता है, वहीं भूजल स्तर खिसकने से कई विकास खंडों में पानी का संकट उत्पन्न हो जाता है। ऐसे विकास खंडों में हालात और बिगड़ने का खतरा बढ़ गया है। शहर और कस्बों में बड़ी तादाद में अवैध आरओ प्लांट संचालित हो रहे हैं। अधिकांश के पास न तो कोई लाइसेंस है और न पानी के जांच की व्यवस्था है। बस बोरिंग कराया और शुरु कर दिया पानी का कारोबार। इससे भूजल का धड़ल्ले से दोहन हो रहा है। जिले में भूजल का स्तर लगातार खिसकता जा रहा है। कुछ जगहों पर इसमें सुधार भी आया है लेकिन अधिकांश जगहों पर समस्या बनी हुई है। भूगर्भ जल विभाग ने कोन विकास खंड अति दोहित क्षेत्र माना है। इसी प्रकार नगर और छानबे विकास खंड सेमी क्रिटिकल हालत में है। मझवां और सीखड़ पहले क्रिटिकल क्षेत्र में थे। हालांकि सीखड़ में सुधार हुआ है और अब वह सेमी क्रिटिकल में आ गया है जबकि मझवां अब भी क्रिटिकल हालत में ही है। जिले में अभी तक सिर्फ एक कंपनी को भूगर्भ जल विभाग से आरो प्लांट की मंजूरी मिली है। एक अन्य की स्वीकृति अभी प्रक्रिया में है। भू भौतिकविद स्वप्निल राय ने बताया कि इस समय लोग शुद्ध जल के नाम पर पानी का कारोबार कर रहे हैं, जो अवैध है। कहा कि अभियान चलाया जाएगा पानी का अवैध कारोबार करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।