गर्मी ने असर दिखाना शुरू कर दिया है। अस्पताल मरीजों से पट गए हैं। प्राथमिक एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर ठीक से इलाज नहीं होने के कारण ज्यादातर मरीज मंडलीय चिकित्सालय में पहुंच रहे हैं। इससे अस्पताल में बेड की किल्लत हो गई है। बिस्तर न मिलने पर तीमारदारों व डाक्टरों में भर्ती करने के लिए नोकझोंक हो रही है। बच्चों के वार्ड में एक-एक बेड पर दो-दो मरीज भर्ती किए जा रहे हैं।
भीषण गर्मी ने असर दिखाना शुरू कर दिया है। डायरिया, टायफायड और मलेरिया जैसी बीमारियों के लोग शिकार हो रहे हैं। ग्रामीण इलाकों से सबसे ज्यादा मरीज आ रहे हैं। जागरूकता की कमी और दूषित खानपान की वजह से लोग बीमारियों के शिकार हो रहे हैं। डायरिया व बुखार से पीड़ित मरीजों को जब परिजन सामुदायिक या प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले जा रहे तो डाक्टर रात में ड्यूटी कर उनका इलाज करने से बचने के लिए मरीजों को जिला चिकित्सालय रेफर कर दे रहे हैं।
इससे समस्त ग्रामीण इलाकों से दुर्घटना के अलावा डायरिया व बुखार के मरीज मंडलीय चिकित्सालय पहुंच जा रहे हैं। जिससे अस्पताल का सभी बिस्तर मरीजों से भर गए हैं। 155 बेड वाले मंडलीय चिकित्सालय में इस समय एक भी बेड खाली नहीं है। सोमवार की रात डाक्टरों को बेड नहीं होने के चलते तीन मरीजों को वाराणसी रेफर करना पड़ा।