नगर के विभिन्न गंगा घाटों पर हरि प्रबोधनी एकादशी पर दीप महोत्सव कार्यक्रम के आयोजन के लिए गंगा घाटों की साफ सफाई कर तैयारी पूरी कर ली गई है। आयोजकों द्वारा गंगा घाटों की साफ सफाई के बाद छात्राओं द्वारा रंगोली बना कर घाट की सुंदरता बढ़ाई जा रही है। घाटों से कूड़े कबाड़ हटवाए जा रहे हैं। दीपदान के अवसर पर गंगा घाट मिट्टी के दिए में भरे सरसों के तेल से जल रहे दीपों से जगमगा उठते हैं। आयोजकों द्वारा गंगा घाटों को दुल्हन की तरह सजाया जा रहा है।
हरि प्रबोधनी एकादशी पर घाटों पर दीपदान का अद्भुत दृश्य देखने के लिए नगरवासियों की भीड़ उमड़ पड़ती है। पुरुष व महिलाओं का हुजूम गंगा घाटों पर दीप महोत्सव का नजारा देखने के लिए शाम होते ही घाटों पर पहुंचने लगते हैं। गंगा घाटंों की सुंदरता को देखने के एि लोग नाव पर बैठ कर गंगा में सैर करते हैं। रात्रि में ऐसा लगता है, मानो आसमान के सारे तारे गंगा घाटों पर उतर आए हैं। नगर के बरियाघाट, सुंदरघाट, बाबाघाट, बदलीघाट, नारघाट, पक्केघाट समेत विंध्याचल के गंगा घाटों पर दीप महोत्सव के दिन घाटों पर दीप जलाए जाते हैं। इस दिन जिनके घरों में दीपावली के पर्व किसी कारणवश नही मनाया जाता है, उनके घरों में भी विद्युत झालर व दिए जलाए जाते हैं। प्रबोधिनी एकादशी को जेठनव एकादशी व देव दीपावली भी कहते हैं।