नगर के रतनगंज स्थित गुरुद्वारा श्री गुरुसिंह सभा में सोमवार को गुरुग्रंथ साहिब का 411 वां प्रकाशोत्सव मनाया गया। गुरुद्वारे में शनिवार से चल रहे अखंड पाठ का समापन सोमवार को हुआ। कार्यक्रम के दौरान शबद-कीर्तन के साथ अटूट लंगर का आयोजन किया गया। इस अवसर पर हजूरी रागी जत्था ज्ञानी अजमेर सिंह ने अपने शबद-कीर्तन की प्रस्तुतियों से मंत्रमुग्ध कर दिया। गुरुद्वारे की सजावट देखते ही बन रही थी।
गुरुग्रंथ साहिब के प्रकाशोत्सव पर गुरुद्वारे में आयोजित शबद-कीर्तन के दौरान हजूरी रागी जत्था ज्ञानी अजमेर सिंह ने- वाणी गुरु है, वाणी विच वाणी अमृत सारे..प्रस्तुत किया। कार्यक्रम के दौरान गुरुनानक गर्ल्स इंटर कालेज एवं गुरुनानक इंटर कालेज की छात्राओं ने शबद-कीर्तन कर गुरुग्रंथ साहिब की वंदना की।
गुरुद्वारे के सचिव सुरजीत सिंह मोंगा ने गुरुग्रंथ साहिब पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि श्री गुरु अर्जुन देव जी ने बाबा बूढ़ा जी को ग्रंथी सौंप कर सन 1604 में दरबार साहिब अमृतसर में प्रकाश कराया। गुरुद्वारा श्रीगुरु सिंह सभा के अध्यक्ष गुरमिंदर सिंह सरना ने कहा कि गुरुग्रंथ साहिब की वाणी के अनुसार चल कर जीवन को सफल बनाया जा सकता है।
कार्यक्रम के तहत अरदास के बाद गुरु लंगर का वितरण किया गया, जिसमें सिख समाज के साथ ही सर्वसमाज के लोगों ने भी लंगर ग्रहण किया। प्रकाशोत्सव कार्यक्रम के दौरान जसबीर सिंह, करमजीत सिंह सरना, अवनीत सिंह, जसवंत सिंह, धरमपाल सिंह, जसप्रीत सिंह मोंगा, महेंद्र सिंह चंडोक, इंदरप्रीत सिंह, राज सिंह, सरवन सिंह, हरदयाल सिंह, नामधारी सहित बड़ी संख्या में सिख समाज के लोग उपस्थित रहे।