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सरकारी नीतियों का सही प्रयोग हो: कैलाश सत्यार्थी

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मिर्जापुर। नोबेल शांति पुरस्कार प्राप्त कैलाश सत्यार्थी शनिवार को लालडिग्गी स्थित रमाशंकर चौरसिया के निवास पर पहुंचे। वे अपने निजी कार्यक्रम में आए थे। उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि बच्चों के प्रति सरकारी नीतियां बहुत अच्छी हैं, लेकिन उसका सही इस्तेमाल किया जाना चाहिए। कैलाश सत्यार्थी बचपन बचाओ आंदोलन के लिए जाने जाते हैंं। उन्होंने कहा कि सरकारी आंकड़ों के अनुसार जितनी देर यहां लोग बैठे हैं, उतनी देर में चार बच्चों के साथ यौन शोषण हो चुका होगा। साथ ही एक घंटे में आठ बच्चे गायब हो चुके होंगे और कहीं खरीदे बेचे जा चुके होंगे। यह इस समय का हाल है। वर्तमान में बच्चों के अश्लील वीडियो व फोटो की मांग बढ़ रही है। इस पर रोक के लिए समाज को आगे आना होगा और इस बुराई को जड़ से मिटाना होगा।
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उन्होंने कहा कि कालीन उद्योग से कोई दुश्मनी नहीं है। इसके प्रति कोई घृणा नहीं है। कार्पेट उद्योग की वजह से देश की आर्थिक स्थिति में काफी सुधार होता है, लेकिन हमारी लड़ाई बच्चों के साथ हो रहे जुल्म को लेकर थी। बिहार में मां बच्चों को याद करके रोती थीं। मैं उन मां और उनके बच्चों के दर्द को समझता था। हमारी लड़ाई उस बुराई के खिलाफ थी। भारत माता इतनी ऊर्जा से भरी हुई हैं। किसी के मां के ऊपर काला धब्बा लगा दे तो कैसे बर्दाश्त कर सकते हैं।
भारत माता के माथे पर गुलामी का कलंक समाप्त होना चाहिए। इसके लिए इंडस्ट्री वालों से उन्होने कहा कि वह कालीन खरीदें, जिसमें इस बात की गारंटी हो कि बाल शोषण नहीं हुआ हो। बात तो तब बनेगी, जब बच्चों का शोषण किए बिना कालीन बनाया जाय और उसका निर्यात हो। इस पर कुछ कार्रवाई हुई, कालीन पर पर्चा (रेगमार्ग) लगाया गया। इससे कालीन निर्यातकों और उपभोक्ताओं को भी अवसर मिला। कालीन का निर्यात किया जाने लगा। इससे देश की छवि भी काफी निखरी। उन्होंने पाॅक्सो न्यायालय के और तेज गति से काम करने की बात कही। वे पथरहिया स्थित गंगाधर दुबे के घर भी गए और उनका भी हाल चाल लिया।
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