आदिवासी बाहुल्य उपरौध क्षेत्र में स्थित श्रीमती इंदिरा गांधी राजकीय पीजी कॉलेज बालिकाओं के लिए उच्च शिक्षा का केंद्र बना हुआ है। उपरौध क्षेत्र का राजकीय पीजी कॉलेज लालगंज 1995 से उच्च शिक्षा की लौ जलाए हुए है।
स्वतंत्रता संग्राम सेनानी रामखेलावन मौर्य के प्रयास से स्थापित किए गए राजकीय पीजी कॉलेज में विज्ञान और कला वर्ग में छात्राएं स्नातकोत्तर की शिक्षा ग्रहण कर रही हैं। यहां यह भी बताना जरूरी है कि विज्ञान की पढ़ाई छात्र तो प्रयागराज और वाराणसी जाकर कर लेते हैं, लेकिन लड़कियां विज्ञान की पढ़ाई से वंचित थी। कॉलेज की स्थापना के बाद लड़कियों का हौसला विज्ञान के प्रति बढ़ता गया। अब यह स्थिति है कि यहां की बालिकाओं ने बीएससी की डिग्री लेकर एमएससी काशी विद्यापीठ से गोल्ड मेडल विजेता के रूप में कॉलेज का गौरव बढ़ाने का काम किया है। कॉलेज में 420 सीट बीए और 240 सीट पीजी की कक्षाओं में है। इन्हीं सीटों पर कॉलेज में प्रवेश होगा। इसी प्रकार विज्ञान में आवश्यकता के अनुसार सीटों की कमी नहीं है। प्रतिदिन कॉलेज में आवेदन की संख्या बढ़ती जा रही है। परास्नातक में पढ़ाई करने वाले और नया प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों का कहना है कि यहां नियमित कक्षाएं चलने व लोक सेवा आयोग के विशेषज्ञ प्राध्यापक प्रोफेसरों के कारण शिक्षा का प्रसार तेजी से हो रहा है। विधानसभा क्षेत्र में यह एकमात्र कॉलेज है, जहां आयोग के प्राध्यापक पढ़ाते हैं। पीजी कॉलेज में प्रवेश के लिए अभी आवेदन आ रहे हैं। कला वर्ग में 200 तथा विज्ञान वर्ग में भी 150 आवेदन आ चुके हैं। इस बार अच्छा परिणाम आने के कारण प्रवेश में कुछ समस्या हो सकती है, लेकिन विश्वविद्यालय के निर्देशानुसार कुछ सीटें बढ़ायी भी जाती हैं। इससे विद्यार्थियों को प्रवेश में परेशानी नहीं होने की बात कही जा रही है। कॉलेज के प्राचार्य डॉ केके गिरी का कहना है कि सभी विषयों में नियमित शैक्षणिक एकेडमिक गतिविधियां चलती हैं। समय-समय पर कॉलेज परिसर के सभागार में सेमिनार का आयोजन किया जाता है और खेलकूद की प्रतियोगिताएं की जाती हैं। समाजशास्त्र विभाग के डॉ सुजीत सिंह ने बताया कि अतिरिक्त कक्षाओं के साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की पढ़ाई भी परिसर में की जाती है।