पहाड़ी ब्लाक के किसान इस वर्ष भी धान की खेती नहीं कर सकेंगे। सिंचाई संसाधनों के समुचित रखरखाव और मरम्मत के अभाव में उपकरण व नहरें खस्ताहाल हो चुके हैं। जिससे ब्लाक में प्रति वर्ष होने वाली हजारों टन धान की उपज प्रभावित होने के आसार हैं। जिसको देखते हुए किसान धान की नर्सरी डालने से भी परहेज कर रहे हैं।
सवा लाख आबादी वाले विकास खंड पहाड़ी में सिंचाई के लिए कहने को संसाधनों का जाल बिछा हुआ है, लेकिन मरम्मत और रखरखाव के अभाव में उपकरण और नहरें खस्ताहाल हो चुकी हैं। पहाड़ी में हिनौती, ढेकवा, नुनौटी, जमुथआ बांध से निकली दो दर्जन से अधिक नहरें हैं।
साथ ही रामनगर सिकरी, कनौरा, कठिनई, सिंधोरा चार पंप कैनाल हैं। वहीं भगेसर, पैड़ापुर, छठहा, अकसौली, रानी चौकिया, माधोपुर, देवाही, कनौरा आदि दर्जनों गांवों के खेतों की सिंचाई के लिए 24 राजकीय नलकूप लगे हैं। राजकीय नलकूप और पंप कैनाल सूखा और प्रकृति कीमार झेल रहे किसानों के लिए एकमात्र सहारा है।
नियमित बिजली नहीं मिलने और तकनीकी गड़बड़ी के चलते पंप कैनाल और राजकीय नलकूप महज शोपीस बन कर रह गए हैं। जिससे किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें पड़ने लगी हैं। किसानों द्वारा बार-बार विभागीय अधिकारियों और जिला प्रशासन का ध्यान सिंचाई संसाधनों की मरम्मत के लिए चक्काजाम करके भी गुहार लगाया गया है, लेकिन आज तक कोई समुचित कार्रवाई नहीं किया गया है।
क्षेत्र के किसान रमेश पांडेय, शिव प्रताप सिंह और मोहन तिवारी ने कहा कि पंप कैनालों व ट्यूबवेल का सही देखरेख नहीं होने का खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है। इनका सही रख रखाव किया गया होता तो किसानों को राहत मिलती।
वहीं राकेश तिवारी, धीरेंद्र सिंह, खिलाड़ी पाल, शिव गोविंद सिंह, रामआसरे, राकेश तिवारी, रामबली दूबे, राजकुमार ने जिला प्रशासन का ध्यान आकृष्ट कराते हुए नहरों की मरम्मत और नलकूपों को दुरुस्त कराने की मांग किया है।