वर्षों से विंध्याचल सहित नगर के कई गंगा घाटों की दशा दयनीय होने से स्नानार्थियों को स्नान करने में असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। गंगा घाटों की सीढ़ियों के ध्वस्त होने से जहां रोजाना लोग गिर कर चुटहिल होते रहते हैं, वहीं गंगा किनारे चारों तरफ फैले कूड़ा-करकट भी मुंह चिढ़ा रहे हैं। कई गंगा घाटों के किनारे पेयजल व प्रकाश की भी कोई व्यवस्था नहीं कराई गई है, जिससे भक्तजन परेशान होते हैं। जिला व पालिका प्रशासन सबकुछ जान कर भी अनजान बना हुआ है।
गंगा की स्वच्छता व निर्मलता को बनाए रखने के लिए जहां केंद्र व प्रदेश की सरकार धन पानी की तरह बहा रही है, वहीं नगर सहित विंध्याचल के गंगा घाटों की दशा दुर्दशा के दंश झेल रहे हैं। गंगा घाटों पर चारों तरफ फैली गंदगी के चलते दैनिक स्नानार्थियों को असुविधा का सामना करना पड़ता है। गंगा किनारे देवालयों व शिवालयों में पूजन आदि करने को जाने वाले श्रद्घालुओं को गंदगी के बीच से होकर गुजरना पड़ता है। गंगा घाटों की वर्षों से क्षतिग्रस्त सीढ़ियों से फिसल कर रोजाना लोग चुटहिल भी होते रहते हैं, वहीं कई घाटों से गंगा में नाले का गंदा पानी व गंदगी भी बेखौफ होकर बहाया जा रहा है, बावजूद इसके जिला प्रशासन चुप्पी साधे है। नगर के रूखड़घाट, कोटघाट सहित लल्लाघाट, नारघाट, फतहां घाट तथा विंध्याचल के कई गंगा घाटों की दशा बद से बदतर हो चुकी है, बावजूद इसके घाटों के सुंदरीकरण के कोई प्रयास नहीं किए जा रहे हैं। घाटों की सीढ़ियों के ध्वस्त होने के कारण लोग किसी तरह पटिया रख कर स्नान करने को मजबूर हैं। अधिकांश गंगा घाटों पर सफाई कर्मियों द्वारा झाडू नहीं लगाए जाने से चारों तरफ कूड़ा-करकट फैला रहता है, जिससे दैनिक के स्नानार्थियों को स्नान सहित विभन्न देवी-देवताओं की मंदिरों में जाकर पूजा-पाठ करने में परेशानी होती है।