रामगया घाट पर पितरों के लिए श्राद्ध करते श्रद्धालु।- सोशल मीडिया।
तीन पीढ़ियों के रिश्तेदारों के घर जाकर मांगते हैं एक मुट्ठी चावल, गया में पिंडदान के दिन सभी करते हैं आमंत्रित
शेरवां। पितृपक्ष में पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए गया में श्राद्ध और पिंडदान की परंपरा निभाई जाती है। गया जाने वाले लोग पीढ़ी-दर-पीढ़ी के रिश्तेदारों और नातेदारों के घर जाकर एक मुट्ठी अक्षत-चावल दान में मांगते हैं। वर्षों से संपर्क न होने के बावजूद तीन पीढ़ियों के रिश्तेदारों के यहां से अक्षत जुटाने की परंपरा निभाई जाती है।
कर्मकांड के विद्वान पंडित गोपाल पांडेय ने बताया कि पितृपक्ष में पूर्वजों के तर्पण के लिए पूजा-अनुष्ठान किए जाते हैं। लोग गंगा घाट, नदी और तालाबों पर तर्पण व पिंडदान करते हैं। गया में पिंडदान का विशेष महत्व है। गया श्राद्ध के दिन रिश्तेदारों, नातेदारों और पड़ोसियों को भी आमंत्रित करने की परंपरा है।
धार्मिक मान्यता है कि पितृपक्ष में कौआ, गाय, गरीब, असहाय, ब्राह्मण और अतिथि का सत्कार करना शुभ माना जाता है।