जिले में गंगा खतरे के निशान से महज चार मीटर नीचे बह रही हैं। बढ़ते जलस्तर और कटान के चलते घाटों के प्राचीन मंदिरों व घाटों पर खतरे के बादल मंडराने लगा हैं। गुरुवार की सुबह आठ बजे गंगा का जलस्तर 73.510 रिकार्ड किया गया जबकि अपरान्ह तीन बजे गंगा का जलस्तर 73.740 तक पहुंच गया था, हालांकि खतरे का निशान 77.724 मीटर है।
गुरुवार की सुबह आठ बजे से दो सेंटीमीटर प्रति घंटा के हिसाब से गंगा के जलस्तर में बढ़ोत्तरी हो रही है। गंगा में जमुना नदी सहित चंबल, केन व बेतवा नदी से छोड़े जाने से गंगा अपने उफान पर हैं, जिसको देख गंगा किनारे बसे लोगों की धुकधुकी बढ़ गई है। गंगा का जलस्तर देखने के लिए गुरुवार की शाम घाटों पर बड़ी संख्या में लोग जुटे हुए थे। गंगा का जलस्तर बढ़ने से जहां एक ओर घाटों की सीढ़ियां गंगा में समहित होने लगी हैं, वहीं प्राचीन मंदिरों पर भी खतरे के बादल मंडराने लगे हैं।
गंगा में उफान के चलते जनपद के तटवर्तीय इलाकों में छानबे, कोन, पड़री, चुनार, सीखड़ एवं नरायनपुर आदि के तटवर्तीय इलाके में बसे लोग नए ठौर-ठिकाने की तलाश में जुट गए हैं। वहीं जिला प्रशासन द्वारा बाढ़ से निपटने का दावा हवाई साबित हो रहा है। ओवरलोड नाव के संचालन पर रोक नहीं है।
विंध्याचल के कई गंगा घाटों सहित नगर के बरियाघाट, सुंदरघाट, बदलीघाट, बाबाघाट, दाऊजीघाट, पक्काघाट, संकठाघाट एवं नारघाट की सीढ़ियां लगातार गंगा में समाहित होने लगी हैं।