खतरे के निशान को पार चुकी गंगा घटने के बजाय चढ़ती ही जा रही हैं। गंगा रौंद्र रूप को देखकर जिले की जनता तथा अधिकारी परेशान हो गए हैं। हर किसी कोई डरा हुआ है कि बाढ़ ने 1978 जैसा रुप ले लिया तो लाखों लोगों को तबाह हो जाएंगे।
गंगा के जलस्तर में लगातार बढ़ोत्तरी जारी है। बुधवार की शाम पांच बजे गंगा का जलस्तर 78.540 रहा। गंगा खतरे के निशान 77.724 से काफी ऊपर बह रही है। एक सेंटीमीटर की रफ्तार से बढ़ रही गंगा से लेागों की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। ऐसी स्थिति में बाढ़ प्रभावित गांवों के लोगों की नींद हराम हो गई है। वह पूरी रात जाग कर अपने छतों पर रात बिताने को विवश हैं।
उन्हें चिंता सताने लगी हैं कि यहीं स्थिति कुछ दिन और रही तो वह कहां जाएंगे। गंगा के बढ़ते जलस्तर को देख कर अधिकारी से लेकर ग्रामीण तक पस्त हो गए हैं। गंगा धीरे धीरे 1978 के बाढ़ के करीब पहुंच रही है। बढ़ते जलस्तर के चलते जिले का मिर्जापुर -औराई मार्ग पूरी तरह से डूब गया है। इस पर लगभग एक फीट से अधिक पानी है।
इसके अलावा पुरजागिर से कंपनीघाट, पुरानेबाड़ा मलाधरपुर, श्रीपट्टी से हरसिंगपुर, तिलठी मल्लेपुर पानी में डूबा हुआ है। इन सड़कों पर तीन फीट से लेकर चार फीट तक पानी भरा हुआ है। मवइयां, मल्लेपुर आदि गांवों के ग्रामीण लगातार पानी बढ़ने को लेकर आशंकित हैं। गैपूरा लालगंज मार्ग के कठवैया पुल पर कर्णावती नदी का पानी भर गया है। जिससे आवागमन पूर्ण रूप से बाधित है। गैपूरा रामपुरघाट मार्ग, जंगीरोड देवरी मार्ग, अकोढ़ी बबुरा मार्ग, भटेवरा डेरवा मार्ग, विरोही महुवारी मार्ग पर पानी भरने के कारण पूरी तरह से बंद है। हलिया कोटाघाट मार्ग डूब गया है।