इमरजेंसी में रखा वेंटीलेटर व ईसीजी। स्रोत- संवाद
- फोटो : संवाद
मिर्जापुर। मेडिकल कॉलेज से संबंद्ध मंडलीय अस्पताल के इमरजेंसी और ट्रामा सेंटर को कुछ महीने पहले ही एनएमसी की गाइड लाइन के पालन का हवाला देते मर्ज किया गया था। ताकि गंभीर मरीजों को बेहतर उपचार मिल सके।
इसके लिए पांच विभागों के डॉक्टरों की तैनाती की गई है। हाल यह है कि इमरजेंसी विभाग में आने वाले मरीजों का उपचार पहले प्रशिक्षण लेने छात्र करते हैं। इसके बाद सीनियर स्टाफ या डॉक्टर करते हैं। जबकि होना यह चाहिए कि सीनियर डॉक्टरों या स्टाफ के सामने प्रशिक्षण लेने आए छात्र इलाज के बारे में जानें।
पहले इमरजेंसी और ट्रॉमा सेंटर आमने-सामने अगल-अलग भवन में था। दूरी अधिक नहीं थी। एनएमसी मानक का हवाला देते हुए दोनों को मर्ज किया गया। ईएमओ के साथ हड्डी रोग, सर्जरी, मेडिसिन और बाल रोग के डॉक्टर की ड्यूटी लगाई गई है।
गंभीर मरीज आए तो सभी डॉक्टर मिलकर उसका बेहतर उपचार कर सकें। इमरजेंसी में ईएमओ और हड्डी के डॉक्टर मौजूद रहते हैं। बाकी विभाग के जूनियर डॉक्टर रहते हैं। कोई गंभीर केस आने पर ऑन काल उनको बुलाने का नियम बनाया गया है। सोमवार को ईएमओ, हड्डी के डाक्टर और बाकी विभाग के जूनियर डाक्टर मौजूद रहे।
साढ़े 12 से एक बजे के करीब आए तीन से चार मरीज को पहले वहां प्रशिक्षण लेने आए छात्र देख रहे थे। वहां मौजूद अन्य सीनियर स्टाफ बैठे रहे। बाद में डॉक्टर और अन्य स्टाफ विश्राम कक्ष से बाहर आए।
बाहरी लोग भी इलाज करते दिखे : सरकार का सख्त नियम है कि अस्पताल में बाहरी व्यक्ति इलाज करते या डॉक्टर के साथ नहीं दिखना चाहिए पर अस्पताल में बाहरी व्यक्ति भी पर्चा लेकर मरीज से बात करते देखे गए।