मई माह के पहले सप्ताह में ही गर्मी ने अपना रंग दिखाना शुरू कर दिया है। पारा लगातार बढ़ता जा रहा है।
धूप इतनी तेज हो रही है मानो आसमान से आग बरस रहा है। बुधवार को पारा 42 पहुंच जाने से नगर के प्रमुख बाजाराें व सड़कों पर दोपहर में सन्नाटा पसरा रहा, वहीं प्रचंड गर्मी से लोग पसीना-पसीना हो रहे हैं।
अघोषित बिजली कटौती से पेयजल संकट भी गहरा गया है।
जेठ महीना के शुरू होते ही तपिश ने अपना सितम दिखाना शुरू कर दिया है। सूर्य की तीक्ष्ण किरणों ने लोगाें को घर से निकलने पर पाबंदी लगा दी है।
मई माह में जबरदस्त लगन के बावजूद दोपहर के समय दूकानों से ग्राहक नदारद रहे। नगरीय इलाके सहित ग्राम्यांचलाें के नदी-नाले, तालाब व कूप सूखने लगे हैं। इंसानों के साथ ही पशु-पक्षियाें को भी पानी के लिए जद्दोजहद करना पड़ रहा है।
जनपद का अधिकांश इलाका पर्वतीय व जंगली होने के कारण भूमिगत जलस्तर काफी नीचे चला गया है जिससे हैंडपंपों ने भी जवाब दे दिया है।
तल्ख धूप के चलते पूर्वान्ह 11 बजे के बाद में शहराें के प्रमुख बाजाराें व सड़काें पर सन्नाटा दिखाई दिया। ग्रामीण इलाकों में भी लोग बहुत ही जरूरी कार्य होने पर ही अपने घराें से बाहर निकल रहे हैं।
गर्मी का सबसे ज्यादा असर स्कूली बच्चाें के साथ ही बीमार व बुजुर्ग लोगाें पर दिखाई दे रहा है। भीषण गर्मी के चलते बिजली की अंधाधुंध कटौती भी दाद में खाज का काम कर रही है। राजकीय नलकूपाें सहित निजी पंप न चलने से पेयजल संकट भी गहराने लगा है।