मिर्जापुर। पैरो में सूजन (हाथीपांव) और दिव्यांगता से लोगों को बचाने के लिए स्वास्थ्य विभाग की टीम 10 अगस्त से घर-घर जाकर लोगों को फाइलेरिया की दवा को खिलाएगी। इसके लिए टीमों का गठन कर दिया गया है। टीमों की निगरानी करने के लिए सुपरवाइजरों की भी तैनाती की गई है।
जिला मलेरिया अधिकारी और फाइलेरिया अभियान के नोडल संजय द्विवेदी ने बताया कि मच्छर के जरिए शरीर में प्रवेश करने वाले माइक्रो फाइलेरिया के कीटाणु स्वस्थ इंसान के शरीर में प्रवेश कर जाते हैं।इसका पता नहीं चलता। उसे नष्ट करना मुश्किल है। इसलिए हर वर्ष अभियान चलाकर फाइलेरिया की तीन दवाओं को उम्र और लंबाई के हिसाब से खिलाया जाता है। इससे कीटाणु का लार्वा नष्ट हो जाता है। लोग रोग का शिकार होने से बच जाते हैं।
उन्होंने बताया कि 10 अगस्त से शुरू हो रहे अभियान में 1927 टीमों को लगाया गया है। इसमें एक आशा और एक आंंगनवाड़ी कार्यकर्ता को शामिल किया गया है। आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता संचारी रोग अभियान के तहत सर्वे का कार्य पूरा कर चुकी हैं। उनको किस परिवार में कितने सदस्य हैं, इस बारे में जानकारी है। दवा पीएचसी पर पहुंचा दी गई है। दवा 10 अगस्त से घर-घर खिलाई जाएगी।
जिला मलेरिया अधिकारी संजय द्विवेदी ने बताया कि फाइलेरिया अभियान में तीन दवाओं को खिलाया जाएगा। इसमें एक एलबेंडा जोल दवा है। इसे एक वर्ष से नीचे के बच्चे को नहीं दी जाएगी। एक वर्ष से बड़े को आधा गोली, दो वर्ष से ऊपर के बच्चे को एक गोली दी जाएगी। दूसरी गोली डीईसी है। इसे उम्र के हिसाब से खिलाना है। दो वर्ष से कम के बच्चे को नहीं खिलाना है। तीसरी गोली आइवरमेक्टिन है। पांच वर्ष के नीचे को नहीं खिलाना है। बाकी अन्य को लंबाई के आधार पर दवा देनी है। इसके लिए टीम को लंबाई का टेप दिया गया है। जिस पर पर लंबाई के आधार पर कितनी गोली देनी है। लिखा है। सीएमओ डॉ.सीएल वर्मा का कहना है कि 10 अगस्त से शुरू होने वाले फाइलेरिया अभियान के लिए टीमों का गठन कर दिया गया है।