मिर्जापुर। जिले में पराली प्रबंधन एक बड़ी समस्या है। इसे लेकर पशुपालन विभाग ने एक योजना तैयार की है। अब किसान पराली के बदले पशु पालन विभाग से गोबर की खाद प्राप्त कर सकेंगे। इसको वे जैविक खाद के रूप में प्रयोग कर खेतों की उपज और आय बढ़ा सकेंगे। जिले में 49 गो-आश्रय स्थलों में वर्तमान में 13841 गोवंश हैं। इन सभी गोआश्रय स्थलों से लगभग 12 हजार किलो गोबर निकल रहा है। इस गोबर का प्रयोग पशुपालन विभाग अब किसानों के खेतों को तैयार करने में है। वह खेतोंं से निकलने वाले पराली को लेकर उसके बदले गोबर देगा। इस समय खेतों में किसान धान की कटाई कर रहे हैं। कहीं-कहीं धान की कटाई पूरी होने के बाद पराली खेतों में छोड़ दिया जा रहा है। कहीं उसे जला दिया जा रहा है। सरकार की ओर से भी किसानों को खेतों में पराली जलाने के बजाए जैविक खाद बनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। किसान पराली को गो-आश्रय स्थलों को दे सकते हैं भले वह गोबर न लें। इस योजना से किसान व पशु पालन विभाग दोनों को सुविधा होगी। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. भूपेंद्र कुमार पाठक ने बताया कि सरकार ने किसानों के हित में कल्याणकारी योजना आरंभ किया है। किसानों को पराली के बदले गोबर दी जाएगी। इसका उद्देश्य पराली जलाने से होने वाले प्रदूषण को रोकना और किसानों को जैविक खाद उपलब्ध कराना है। किसानों को लाभ होगा साथ ही पर्यावरण संरक्षण भी हो सकेगा।