सक्तेशगढ़। हमें रासायनिक खेती छोड़कर हमें जैविक खेती की तरफ ध्यान देना होगा। अन्यथा हमारी आने वाली पीढि़यों को तमाम समस्याओं का समाना करना पड़ सकता है। इसके लिए हमें गो पालन करना होगा। ये बातें बीएचयू साउथ कैंपस के कृषि वैज्ञानिक डॉ एस एन सिंह ले कही। वह रविवार को भावा स्थित पंचायत भवन में कृषि विभाग की तरफ से राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि आज देश में कैंसर, हृदय रोग, ब्लड प्रेशर, शुगर, ब्लड कैंसर जैसी भयानक बीमारियां तेजी से फैल रही हैं। उसका मुख्य कारण फसलों में रासायनिक खादों का प्रयोग होना है। धान के बारे में जानकारी दे हुए कृषि वैज्ञानिक ने कहा धान का पौधा मिट्टी के अंदर पाए जाने वाले पोषक तत्वों को अधिक खींचता है। जिससे मिट्टी की उर्वराशक्ति दिनों दिन कम होती जा रही है। रासायनिक खादों का प्रयोग करने के कारण मिट्टी छारीय होती जा रही है। यह फसलों के लिए नुकसानदेय है। रासायनिक खादों के कारण पंजाब हरियाणा और यूपी का गेहूं बाजार में कम दामों पर बिकता है। जबकि जैविक खाद का प्रयोग करने के चलते मध्य प्रदेश, राजस्थान व छत्तीसगढ़ का गेहूं बाजार में अधिक दामों से बिक रहा है। उन्होंने मोटे अनाजों में ज्वार, बाजरा, सावां, रागी, मडुवा, चना, मटर, मसूर की खेती पर जोर दिया।
कृषि विभाग के तकनीकी सहायक विजय कुमार मौर्य ने सोलर पंप और उसमें हो रही छूट के बारे में किसानों को जानकारी दी। कार्यक्रम के बाद कृषि वैज्ञानिक ने फसल चक्र के क्रम में भावा में चने के तैयार फसल का अवलोकन किया। इस मौके पर एटीएम अमित सिंह, बृजेश कुमार सिंह, सरदार हरफूल सिंह, शमशेर बहादुर सिंह, रामकुमार सिंह, विमल कुमार सिंह आदि किसान मौजूद रहे।