जिला सहकारी बैंकों से रुपयों के लेने-देन पर प्रतिबंध होने से किसानों के सामने समस्याओं का अंबार खड़ा हो गया है। बुधवार को जिला सहकारी बैंकों एवं साधन सहकारी समितियों पर किसानों की लंबी भीड़ देखने को मिली। समितियों से न तो किसानों को खाद मिल रहा है और न ही जिला सहकारी बैंकाें से पैसे का ही भुगतान हो पाया, जिससे कृषक रबी की बुवाई का कार्य नहीं कर पा रहे हैं, जिससे उनमें मायूसी छाई है।
धान के कटोरे के नाम से विख्यात विकास खंड जमालपुर पांच हजार एकड़ खेत में रबी की बुवाई की जानी है, लेकिन वर्तमान समय में किसानों को कुछ सूझ रहा कि वह पैसे के अभाव में करें भी तो क्या करें। साधन सहकारी समिति चौकिया सहित जमालपुर, बहुआर, मठना, छोटा मिर्जापुर, खेमईबरी सहित दर्जनाें साधन सहकारी समितियों पर हजाराें बोरी यूरिया व डीएपी मौजूद होने के बावजूद पैसे के अभाव में किसानों को नहीं मिल पा रहा है।
समितियाें के सचिवों द्वारा किसानों को चेक तो प्रदान कर दिया गया, लेकिन बैंक से चेक का भुगतान नहीं होने से किसान समितियों को उर्वरक को उठा नहीं पा रहे हैं। बहुआर स्थित एफसीआई के सचिव चंद्रभान सिंह, साधन सहकारी समिति चौकिया के सचिव सोहन यादव तथा जमालपुर के सचिव नरेंद्र सिंह ने बताया कि विगत 14 तारीख को किसानों द्वारा जो किसान पहले कर्ज लेकर नया चेक बनवा कर बैंक पहुंचे, लेकिन बैंक से उन्हें भुगतान नहीं किया गया। जिन किसानाें ने समितियाें पर अपने पुराने कर्ज का नकद भुगतान किया है, उसे भी बैंक नहीं लिया।
वर्ष 2014-15 में जो किसान रबी की बुआई के लिए समितियों से कर्ज लिए थे उसका भुगतान सैकड़ाें किसानों ने 14 नवंबर को क्षेत्र के विभिन्न समितियों पर नकद भुगतान करके चेक लेकर बैंक चले गए, लेकिन न तो उनका बैंक में चेक भजा और न ही सचिवों द्वारा बैंक में पैसा ही जमा हो पाया है। समितियों पर तैनात सचिव और बैंक प्रबंधकों का कहना है कि जब तक कोई नया आदेश नहीं आ जाता है तब तक हम किसी भी प्रकार का नकद भुगतान नहीं कर सकते हैं।