मिर्जापुर। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की तरफ से भारतीय सामान पर लगाए गए 50 प्रतिशत टैरिफ को घटा कर 18 प्रतिशत कर देने से कार्पेट, दरी के निर्यातकों में हर्ष व्याप्त है। इससे जुड़े उद्यमियों का कहना है कि इससे व्यापार को गति मिलेगी। भारतीय सामान पर कुछ महीने पहले टैरिफ बढ़ने से निर्यात पर बुरा प्रभाव पड़ा था। नए ऑर्डर का अभाव हो गया था। मिर्जापुर में तैयार कालीन और दरी भी काफी बड़ी मात्रा में डंप हो गए थे। अब घटे टैरिफ से पुराने दिन लौटने की उम्मीद की जा रही है। इसी तरह पीतल बर्तन व मेटल से जुड़े उद्यमियों का कहना है कि बैंकों से ऋण सुविधा को सरल तथा एमएसएमई ग्रोथ फंड बढ़ाने के प्रस्ताव से सूक्ष्म तथा लघु उद्योग को फायदा मिलेगा। साथ ही पुराने औद्योगिक कलस्टरों का पुनरुद्धार की योजना बनाकर फंड का प्रावधान किया गया है। इससे मिर्जापुर पीतल बर्तन उद्योग को क्रेडिट स्टेट तथा तकनीकी उन्नयन का लाभ मिल सकता है।
इस साल के केंद्रीय बजट में एमएसएमई एवं लघु उद्योग सेक्टर के लिए भी विशेष प्रावधान किया गया है जो स्वागत योग्य है। निर्यात से संबंधित बैंक ऋण में भी ब्याज दर में कटौती की जा रही हैं।- आशीष बुधिया, अध्यक्ष, मिर्जापुर दरी कारपेट मैन्युफैक्चरस एसोसिएशन।
टैरिफ ज्यादा होने से जो कारपेट इंडस्ट्री मंदी में चली गई थी। टैरिफ कम होने से उसमे पुनः एक नई उम्मीद की किरण मिली तथा नये आर्डर आने शुरू होंगे। साथ ही दरी कारपेट का व्यापारिक विकास होगा, जिससे रोजगार बढ़ेगा।-अश्वनी जैन, दरी कारपेट निर्यातक।
दरी–कारपेट उद्योग पर टैरिफ 50% से घटाकर 18% किया जाना स्वागतयोग्य कदम है। इससे निर्यात को बढ़ावा मिलेगा तथा जो माल तैयार गोदाम में पड़े है वो निर्यात शुरू हो जाएंगे। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय दरी–कारपेट की प्रतिस्पर्धा मजबूत होगी।
-मनोज खंडेलवाल, सचिव, मिर्जापुर दरी कारपेट मैन्युफैक्चरस एसोसिएशन।
लघु उद्योग को निर्यात उन्मुख बनाने पर जोर दिया गया है तथा ग्लोबल वैल्यू चेन से जोड़ने की बात कही गई है। इसका फायदा पीतल बर्तन उद्यमी ले सकते हैं। सरकारी खरीद में सूचना तथा लघु उद्योग ऑन को उद्यम रजिस्ट्रेशन के आधार पर लाभ मिल सकेगा।
-मोहनदास अग्रवाल, डिवीजनल चेयर मैन, आईआईए।
जिस व्यापारी का व्यापार एक करोड़ रुपये से ज्यादा होती है उसे कैसलेश इलाज की सुविधा दिए जाने की मांग की गई थी। बर्तन व्यापारी के हितों को देखते हुए सरकार को इस पर ध्यान देनी चाहिए।-संतोष अग्रवाल, अग्रसेन मेटल्स।
पिछली बार ही सरकार ने कच्चे माल पर जीएसटी 18 प्रतिशत और तैयार माल पर जीएसटी पांच प्रतिशत है। बीच का 13 प्रतिशत बचत है। जितना हम रिर्टन भरेंगे वह पैसा हमें सरकार से वापस मिल रहा है। -कल्याण अग्रहरी, मेटल उद्यमी।