कछवां में सूखे तालाब में खेलते बच्चे। अमर उजाला
विकास खंड मझवां में सार्वजनिक तालाबों ंपर निरंतर हो रहे अतिक्रमण से उसका अस्तित्व मिटता जा रहा है। मझवां ब्लॉक में राजस्व परिषद के अभिलेखों में 191 तालाब में दर्ज हैं, लेकिन धरातली पृष्ठभूमि पर 61 तालाब ही दिखाई देते हैं, शेष 130 तालाबों पर दबंगों द्वारा अतिक्रमण कर लिया गया है, जिससे तालाबों की पहचान खोती चली जा रही है। शेष तालाबों में पानी नहीं होने से मवेशी प्यासे रह जा रहे हैं। इसके चलते भूजल भ्ाी काफी नीचे चला गया है।
वर्षों पूर्व ग्रामीण अंचलों में स्नान करने, कपड़े धोने तथा मवेशियों को पानी पिलाने और भूमिगत जलस्तर को सामान्य रखने के लिए तालाब ही एक महत्वपूर्ण साधन था, लेकिन विकास के दौर में परंपरागत जलस्रोतों को कुछ लोग नुकसान पहुंचाते चले जा रहे हैं। मझवां ब्लाक के 191 जलस्रोतों को पुन: जीवित करने के लिए कोई भी ठोस कदम अधिकारियों द्वारा नहीं उठाया जा रहा है। मझवां ब्लाक के बरैनी गांव के लोगों का कहना है कि आठ एकड़ में फैला तालाब में पानी से भरा रहता था और उसी तालाब के नाम से गांव का भी अस्तित्व रहता था। तालाब की जमीन पर अवैध कब्जा कर लोग घर तो बना लिए जिससे पारंपरिक जलस्रोतों का अस्तित्व समाप्त हो गया।
क्षेत्र के सेमरी, चड़िया, महामलपुर, भैंसा, कटका, गड़ौली, मझवां, पड़ेरी, सबेसर आदि गांवों में लोग तालाबों पर अतिक्रमण कर रखे हैं। गंगा के मैदान में बसे होने के बावजूद मझवां ब्लाक में तालाबों का अस्तित्व खतरे में है। ब्लाक में हैंडपंपों की संख्या 4091 है, जिसमें 330 रिबोर की बाट जोह रहे हैं, वहीं 462 हैंडपंप खराब पड़े हुए हैं, जिससे पेयजल समस्या बनी हुई है। क्षेत्र के सेमरी, चड़िया, महामलपुर, भैंसा, कटका, गड़ौली, मझवां, पड़ेरी, सबेसर आदि गांवों में लोग तालाबों पर अतिक्रमण होने से तालाबों के अस्तित्व पर ग्रहण लगता चला जा रहा है। लोगों ने प्रश्ाासन से इस बाबत जल्द ही पहल की मांग की है।