जिला विज्ञान क्लब के माध्यम से सोमवार को विश्व रक्तदाता दिवस पर बाल वैज्ञानिकों, विज्ञान संचार को के बीच एक वर्चुअल कार्यशाला का आयोजन किया गया। जिसमें इसमें 68 लोगों ने प्रतिभागिता की। विज्ञान क्लब के जिला समन्वयक सुशील कुमार पांडेय ने बताया कि इस वर्ष की मुख्य थीम ‘रक्त दो और दुनिया को धड़काते रहो’ है। उन्होंने बताया कि विश्व रक्तदाता दिवस 14 जून को नोबेल विजेता कॉल लैंड स्टाइनर का जन्म हुआ था। यह वही साइंटिस्ट थे जिन्होंने ए, बी, ओ ब्लड ग्रुप सिस्टम को खोजा। विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा इस दिन को रक्तदान दिवस के रूप में घोषित किया गया। इसका उद्देश्य सुरक्षित रक्त उत्पादों की आवश्यकता के बारे में जागरूकता बढ़ाना और रक्तदाताओं के सुरक्षित जीवन रक्षक रक्त के दान करने के लिए प्रोत्साहित करना है। रक्त ट्रांसफ्यूजन विशेषज्ञ डॉ. पीके सेठ ने बताया कि रक्त मानव शरीर में संचरण करने वाला तरल पदार्थ है। जो शिराओं के द्वारा हृदय में जमा होता है और धमनियों द्वारा पुन: हृदय से संपूर्ण शरीर में परिसंचारित होता है। शोध छात्र रामकुमार ने बताया कि ओ नेगेटिव ब्लड ग्रुप यूनिवर्सल डोनर कहलाता है। इसे किसी भी व्यक्ति को दिया जा सकता है। कार्यक्रम के समापन सत्र में सभी ने ब्लड डोनेट करने की शपथ ली तथा इसके प्रचार-प्रसार में मदद करने की बात कही।