नगर के रमईपट्टी स्थित भारतीय स्टेट बैंक शाखा के बाहर कतार में खड़े ग्राहक।
नोटबंदी के बाद से नकदी की किल्लत से जिले की आम जनता परेशान है। शनिवार को बैंकों के बाहर ग्राहकों की कतारें काफी छोटी दिखीं, वहीं कई एटीएम पर पैसा निकालने के लिए ग्राहकों की लंबी कतारें लगी रहीं। शनिवार को बैंकों पर सिर्फ वरिष्ठ नागरिक पांच सौ और एक हजार के पुराने नोट बैंकों में जाकर बदलवाने में मशगूल दिखाई दिए। विगत दो दिनों से बैंकों में लग रही लाइन छोटी तो जरूर हो रही है, लेकिन अधिकांश बैंकों में समय से पूर्व ही पैसा समाप्त हो जा रहा है, जिससे ग्राहकों को बिना पैसा लिए बैरंग वापस लौटना पड़ा।
नोटबंदी के 11 वें दिन शनिवार को नगरीय इलाकों सहित जिले के ग्रामीण अंचलों में स्थित विभिन्न बैंकों व एटीएम पर पैसा निकालने व जमा करने को ग्राहकों का तांता लगा रहा। पिछले कुछ दिनों से नोटबंदी के बाद बैंकों पर उमड़ी भारी भीड़ होने की वजह से नोट के प्रति आपाधापी और हालात जल्द सामान्य के आसार नजर नहीं दिख रहे हैं। शनिवार को बैंकों पर ग्राहकों की संख्या अन्य दिनों की अपेक्षा कम जो जरूर देखी गई, लेकिन बैंक के काउंटर पर पैसा बदलवाने के लिए सिर्फ बुजुर्ग ही डटे रहे।
शनिवार को भी बैंकों में कैश की कमी के चलते कई बैंकों से ग्राहकों को बैरंग वापस लौटा दिया गया, वहीं कुछ बैंकों में कैश नहीं है का बोर्ड भी लगा दिया गया था, जिससे ग्राहकों में मायूसी देेखने को मिली। नोटबंदी के बाद जहां एक ओर बैंक मैनेजर कैश की कमी का रोना रो रहे हैं, वहीं दूसरी ओर ग्राहक कतार से हटने का नाम नहीं ले रहे हैं। ऐसी आपाधापी की स्थिति में कहीं-कहीं बैंक कर्मियों व ग्राहकों के बीच नोकझोंक भी हुई। शादी वाले घरों में ढाई लाख रुपये शादी के आयोजन के लिए मिलने का प्रावधान जारी किया गया है, लेकिन शनिवार को अधिकांश बैंकों से यह सुविधा ग्राहकों को नहीं मिल पाई, जिससे ग्राहक परेशान दिखाई दिए। नोटबंदी से जहां उद्योग-धंधों पर ग्रहण लगता चला जा रहा है, वहीं आम जनता की दिनचर्या प्रभावित हो रही है।