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ड्रमंडगंज: बंदरों का उत्पात, दहशत में जी रहे बाजारवासी

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ड्रमंडगंज। क्षेत्र के देवहट (ड्रमंडगंज) बाजार में बंदरों का उत्पात थमने का नाम नहीं ले रहा है। बंदरों के हमले से अबतक दर्जनों की संख्या में पुरुष, महिला और बच्चे शामिल हैं, बावजूद इसके अभी तक बंदरों के खिलाफ कोई कार्रवाई न होने से लोगों में रोष व्याप्त है।
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पिछले दो वर्षों से क्षेत्र में बंदरों का आतंक इतना अधिक बढ़ गया है कि लोगों का घर से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। दुकान, घर व मकान का दरवाजा खुला होने पर बंदर घरों में प्रवेश कर जाते हैं। जिससे घर व गृहस्थी का सामान नष्ट हो जा रहा है। देवहट निवासी अधिवक्ता जय प्रकाश केशरी का कहना है कि बीते बृहस्पतिवार को उनकी चार वर्षीय पुत्री जया घर के सामने चबूतरे पर खेल रही थी उसी दौरान झुंड के साथ पहुंचे एक बंदर ने उसे काटकर घायल कर दिया। ज्ञानदास गुप्ता ने बताया कि डेढ़ वर्ष पहले घर की छत पर बैठकर उनकी 85 वर्षीय माता रमा देवी धूप ले रही थी, बंदरों ने उन्हें काटकर घायल कर दिया। इसी तरह एक वर्ष पहले बंदरों के हमले से घबराकर भाग रहे 30 वर्षीय कन्हैया केशरवानी अपने मकान की छत से नीचे गिरने से उनका दोनों पैर टूट गया था। बंदरों के आतंक से जूझ रहे ड्रमंडगंज बाजारवासियों ने समस्या से निजात दिलाने की मांग की है।
इस संबंध में प्रभागीय वनाधिकारी अरविंदराज मिश्र का कहना है कि शासन द्वारा अब बंदरों के उत्पात पर अंकुश लगाने की जिम्मेदारी से वन विभाग को मुक्त कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि अब नगरीय क्षेत्र में नगरपालिका तथा ग्रामीण क्षेत्र में ग्राम पंचायतों को बंदरों के उत्पात पर अंकुश लगाने की जिम्मेदारी दी गई है।
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