कछवां। आदर्श नगर पंचायत के मंगरवारी वार्ड स्थित श्रीराम-जानकी मंदिर परिसर में चल रहे सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का शुक्रवार को देर रात समापन हुआ। कथा के आखिरी दिन बड़ी संख्या में श्रोता उपस्थित हुए।
कथावाचक मृत्युंजयानंद महाराज ने श्रोताओं को धर्म, भक्ति और सदाचार का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि कन्या को दिया गया दान कभी अपना नहीं कहना चाहिए। यदि दान को अपना कहा जाए तो उसका महत्व समाप्त हो जाता है। उन्होंने बताया कि पीपल के पेड़ के नीचे स्वयं भगवान का वास माना जाता है, इसलिए वहां सुबह उजाला होने के बाद ही जाना चाहिए। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता का मार्मिक वर्णन करते हुए बताया कि सच्ची मित्रता निस्वार्थ भाव और विश्वास पर आधारित होती है। इस दौरान मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में महिलाओं समेत बच्चे, बूढ़े व नौजवान श्रद्धालु उपस्थित रहे। संवाद