अस्पताल में जमीन पर बैठे मरीज और तीमारदार
- फोटो : अमर उजाला
कछवां सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर डिप्टी सीएमओ के निरीक्षण के दौरान सुबह साढ़े आठ बजे चार चिकित्सक पहुंचे ही नहीं थे। दो फार्मासिस्ट भी गायब थे जबकि मरीजों की भीड़ लगी थी। गैरहाजिर डाक्टरों व कर्मचारियों का एक दिन का वेतन रोकने का आदेश दिया गया है। उनसे इस बाबत स्पष्टीकरण भी मांगा गया है।
डाक्टरों की लेट लतीफी का खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की हालत बेहद खराब है। तीस बेड के इस अस्पताल में केवल गर्भवती महिलाओं को ही भर्ती किया जाता है। बच्चों और अन्य मरीजों को डाक्टर की कमी बता कर भर्ती करने से इंकार कर दिया जाता है। बताया जाता है कि अस्पताल में बच्चों का और हड्डी का डाक्टर उपलब्ध नहीं है।
इससे प्राइवेट कम पढ़े लिखे डाक्टरों की पौ बारह है। गर्मी के सीजन में सैकड़ो मरीज यहां पहुंच रहे हैं लेकिन एक तो डाक्टरों कब कमी और दूसरे उनकी लेटलतीफी के कारण मरीजों को परेशान होना पड़ रहा है। इन्हीं शिकायतों की जांच करने डिप्टी सीएमओ डा. ए के सोनकर सोमवार की सुबह साढे आठ बजे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंच गए। उन्होंने सबसे पहले उपस्थिति रजिस्टर को अपने कब्जे में ले लिया। साढे आठ बजे तक डाक्टरों सहित छह कर्मचारी अनुपस्थित मिले। इनमें डा. रूपम पाल, डा. सुमन कुमारी, डा. जय सिंह, डा. अमनदत्त मिश्र के अलावा फार्मासिस्ट पीसी राय और रामसेवक चौरसिया शामिल रहे।
इस पर डिप्टी सीएमओ ने नाराजगी जताते हुए मुख्य चिकित्साधिकारी से अनुपस्थित डाक्टरों और पैरा मेडिकल स्टाफ का एक दिन का वेतन रोकने का निवेदन करते हुए सभी अनुपस्थित कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया। डिप्टी सीएमओ ने प्रसूता वार्ड में जा कर सुविधाओं का जायजा लिया। तीमारदारों ने भोजन समय से नहीं मिलने की समस्या के बारे में बताया। दूर से आने वाली गर्भवती महिलाओं को घर से भोजन लाने में परेशानी होती है। तीमारदारों ने दाल और दूध की क्वालिटी पर प्रश्नचिन्ह लगाया। उन्होंने भोजन देने वाले ठेकेदार को बुला कर सुधर जाने की चेतावनी दी।