मिर्जापुर। नगर पालिका मिर्जापुर के तहत आने वाले 17 बड़े नालों का सीवेज बगैर शोधन के सीधे गंगा में गिर रहा है। इससे गंगा में प्रदूषण बढ़ता जा रहा है। वर्तमान में नमामि गंगे योजना के तहत लगभग 129 करोड़ रुपये की परियोजना इस समस्या के निदान के लिए बनाई गई है। इसके बावजूद 17 बड़े नालों का गंदा पानी सीधे गंगा में जाकर नदी जल को प्रदूषित कर रहा है। कार्यदायी संस्था का दावा है कि जनवरी 2024 तक सभी नालों को टैप्ड कर सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) से जोड़ दिया जाएगा। उसके बाद गंदा पानी शोधित होकर ही गिरेगा। दावा है कि वर्तमान में गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई नालों को टैप्ड करने का काम कर रही है। गंगा एक्शन प्लान के तहत करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद नदी के जल को प्रदूषित करने का सिलसिला जारी है। नगर में छोटे, बड़े व मझोले मिलाकर कुल 174 नाले हैं। इनमें से बड़े नालों की संख्या नगर पालिका परिषद के हिसाब से 27 है। इनमें से 10 बड़े नालों को सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से जोड़ा गया है। इन टैप्ड नालों का लगभग 16.58 एमएलडी सीवेज शोधित करके गंगा में गिराया जा रहा है। इसके लिए पक्का पोखरा में 14 एमएलडी, कचहरी में 3 एमएलडी और इमामबाड़ा क्षेत्र में 3 एमएलडी क्षमता के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाए गए हैं। उधर, नगर से प्रतिदिन करीब 31 एमएलडी सीवेज का निस्तारण होता है। इनमें से तीन सीवेज ट्रीटमेंट प्लांटों में 20 एमएलडी सीवेज का शोधन किया जा रहा है, जबकि 14 एमएलडी सीवेज बगैर शोधन के सीधे गंगा में जाकर मिल रहा है। इसके चलते गंगा का जल प्रदूषित हो रहा है।
उधर, नगर में अभी सीवर लाइन बिछाने का कार्य प्रगति पर है। कुछ जगह नालों को टैप्ड करके सीवेज को गंगा में जाने से रोका गया है। इन सबके बावजूद 17 बड़े नालों का 14 एमएलडी सीवेज बिना शोधन के ही गंगा में गिर रहा है। गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई के अधिशासी अभियंता आशीष कुमार का कहना है कि कार्य की भौतिक प्रगति 50 प्रतिशत है। निर्धारित समय जनवरी 2024 तक सारे कार्य पूरे कर लिए जाएंगे।
उधर, नगर की बड़ी आबादी नदी किनारे ही घने मोहल्लों में बसती है। तमाम घरों का गंदा पानी नाली के सहारे सीधे गंगा नदी में मिल जाता हैं। इसके साथ ही कई उद्योगों में ईटीपी लगाए गए हैं। घाट किनारे बसे मोहल्ला में भी पाइप लाइन बिछाकर गंदे पानी को सीवर ट्रीटमेंट प्लांट तक भेजने की योजना है। गंदे जल के शोधन के लिए विंध्याचल में सात एमएलडी क्षमता का एसटीपी शुरू हो गया है। पक्का पोखरा में 8.5 एमएलडी व विसुंदरपुर में 8.5 एमएलडी क्षमता के दो नए एसटीपी निर्माणाधीन है। इसके अतिरिक्त पक्का पोखरा में 14 एमएलडी क्षमता का एसटीपी पहले से ही काम कर रहा है। कार्यदायी संस्था गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई का दावा है कि जब ये सभी एसटीपी चालू हो जाएंगे तो गंगा में शोधित जल ही जाएगा।