लालगंज के तेंदुई में श्रीमद् भागवत कथा का श्रवण करते श्रोता, संवाद
- फोटो : जीआईसी में मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना के तहत शुरू हुई कक्षा में पढ़ातीं जिला युवा अधिकारी वर्तिका सिंह।
लालगंज। तेंदुई स्थित जानकी कुंज मंदिर परिसर में चल रही श्रीमद्भागवत महापुराण कथा के दूसरे दिन बृहस्पतिवार को दशम स्कंध का प्रसंग सुनाते हुए कथावाचक पवन कुमार महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण के अवतार से पूर्व की कथा सुनाई। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण प्राणियों के जीवनदाता और सभी के हृदय में विराजमान परमात्मा हैं। उनकी लीलाएं संसार के कल्याण का मार्ग दिखाती हैं। कहा कि भक्ति क्रोध, मोह और लोभ को दूर कर जीवन को सन्मार्ग पर ले जाती है।
उन्होंने कहा कि श्रद्धा और भाव से भागवत कथा का श्रवण करने से मनुष्य के भीतर भक्ति जाग्रत होती है। भगवान श्रीकृष्ण का नाम दुखों से पार लगाने वाली नाव के समान है। कथा में पृथ्वी पर बढ़ते अत्याचार और अधर्म का प्रसंग सुनाया गया। उन्होंने बताया कि पृथ्वी गाय का रूप धारण कर ब्रह्मा की शरण में पहुंचीं। ब्रह्मा सहित देवताओं ने क्षीरसागर के तट पर भगवान की स्तुति की। भगवान ने पृथ्वी का भार कम करने के लिए श्रीकृष्ण के रूप में प्रकट होने की बात कही और देवताओं को भी अपने अंश के साथ पृथ्वी पर जन्म लेने का निर्देश दिया। इसके बाद वासुदेव और देवकी के विवाह का प्रसंग आया। आकाशवाणी का प्रसंग आया। आकाशवाणी हुई कि देवकी की आठवीं संतान कंस के वध का कारण बनेगी। कंस ने देवकी को मारने के लिए तलवार उठा ली लेकिन वासुदेव ने उसे समझाकर रोक दिया। कथा में बताया गया कि जब भगवान श्रीकृष्ण के अवतार का समय आया तो देवकी के शरीर में दिव्य तेज बढ़ गया। मुख्य यजमान संत बाल योगी संजय महाराज ने कथा का श्रवण किया। अमरनाथ तिवारी जानकी देवी ने आरती की। समिति के अशोक तिवारी व नवीन तिवारी व्यवस्था में लगे रहे।