गुप्त नवरात्र के नवमी पर मां विंध्यवासिनी के दर्शन के लिए कतारबद्ध श्रद्धालु।- संवाद।
गुप्त नवरात्रि की नवमी तिथि पर बृहस्पतिवार को शक्तिपीठ विंध्यधाम श्रद्धा, भक्ति और जयकारों से गूंज उठा। मंगला आरती से पहले ही मां विंध्यवासिनी के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लग गईं।
गंगा स्नान के बाद भक्तों ने मां के दरबार में शीश नवाकर सुख-समृद्धि और परिवार के मंगल की कामना की। श्रद्धालुओं ने हवन-यज्ञशाला में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच आहुतियां अर्पित कर देवी का आशीर्वाद प्राप्त किया। श्री विंध्य पंडा समाज अध्यक्ष पंकज द्विवेदी के अनुसार सवा लाख से अधिक देवी भक्तों ने मां विंध्यवासिनी के दर्शन किए।
नवमी तिथि का विशेष महत्व होने के कारण बड़ी संख्या में श्रद्धालु बुधवार रात ही विंध्यधाम पहुंच गए थे। होटल, धर्मशालाओं और आश्रमों में रात्रि विश्राम करने के बाद भक्त ब्रह्ममुहूर्त में गंगा स्नान कर मंदिर पहुंचे।
मंगला आरती के उपरांत जैसे ही मंदिर के कपाट खुले, श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। पूरे दिन गर्भगृह और मंदिर परिसर श्रद्धालुओं से खचाखच भरा रहा।
मां विंध्यवासिनी के दर्शन के बाद श्रद्धालु अष्टभुजा पर्वत और काली खोह मंदिर पहुंचे, जहां माता अष्टभुजा और मां काली के दर्शन-पूजन कर त्रिकोण परिक्रमा पूरी की।
हवन-यज्ञशाला में श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से आहुतियां देकर विश्व कल्याण, परिवार की सुख-शांति और मनोकामना सिद्धि की प्रार्थना की।
देर रात शयन आरती तक दर्शन-पूजन का क्रम अनवरत चलता रहा और पूरा विंध्यधाम मां विंध्यवासिनी के जयकारे से गुंजायमान रहा।