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अष्टमी पर नहीं हुआ मां विंध्यवासिनी का दिदार, मायूस दिखे श्रद्धालु

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विंध्याचल। चैत्र नवरात्र में नवमी तक मां विंध्यवासिनी मंदिर में दर्शन, पूजन पर लगी पाबंदी के बावजूद अष्टमी पर आस्थाधाम में मंगलवार की सुबह श्रद्धालुओं का रेला उमड़ा। बड़ी संख्या में पहुंचे भक्तों को भले ही प्रवेश न मिला पर उन्होंने मंदिर का पताका दर्शन कर अपनी श्रद्धा समर्पित की। यही नहीं मोटर साइकिल समेत प्राइवेट संसाधनों के जरिए देवी धाम पहुंचे कई भक्तों ने अपने बच्चों का मुंडन कराया। गंगाघाट पर भी भीड़भाड़ बनी रही। विभिन्न गंगाघाटो पर बच्चों के मुंडन व स्नान करने के बाद श्रद्धालु मां विंध्यवासिनी के दर्शन के लिए मंदिर गए। हांथो में माला, फूल, नारियल, चुनरी व प्रसाद लिए भक्त परिक्रमा पथ तक पहुंचे कि वहां पहले से मौजूद सुरक्षाकर्मियों ने उनका रास्ता रोक दिया। कई श्रद्धालु मंदिर की सीढ़ी तक पहुंचने के लिए मिन्नते करते दिखे। जब उनको मंदिर में प्रवेश नहीं मिला तो उन्होंने पचास मीटर पहले ही जमीन पर माता का प्रसाद चढ़ाकर नतमस्तक हो फरहरा का दर्शन किया और वापस लौट गए। बतातें चलें कि मंगलवार का दिन होने के कारण बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे। माता के ध्वज का दर्शन कर कई श्रद्धालु त्रिकोण मार्ग पर विराजमान देवियों के दर्शन व पूजन के लिए निकल गए।
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उधर, कोरोना महामारी से मुक्ति दिलाने के लिए श्रीविंध्य पंडा समाज अध्यक्ष पंकज द्विवेदी एवं मंत्री भानु पाठक की देखरेख में मां विंध्यवासिनी मंदिर परिसर में अखंड भजन कीर्तन शुरू किया गया है। चौबीस घंटे मां विंध्यवासिनी से आराधना की जा रही है। जय मां दुर्गा, जय मां तारा दयामई कल्याण करो की गूंज से समूचा मंदिर परिसर गुंजायमान हो रहा है। सोशल डिस्टेंसिंग में आयोजित इस भजन व कीर्तन में सिर्फ पंडा समाज के पदाधिकारी को अनुमति दी गई है। इस दौरान श्री विंध्य पंडा समाज अध्यक्ष पंकज द्विवेदी, मंत्री भानु पाठक, पूर्व अध्यक्ष पं. राजन पाठक सहित समाज के अन्य पदाधिकारी व सदस्य मौजूद रहे।
चैत्र नवरात्र में भले ही मां विंध्यवासिनी मंदिर दर्शन व पूजन के लिए आम श्रद्धालुओं के लिए प्रतिबंधित रहा। लेकिन मंदिर की छत पर साधकों की ओर से अनुष्ठान आदि जारी रहा।
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सोशल डिस्टेंसिंग में जगह-जगह बैठे साधक विश्व कल्याण के लिए जप, तप में जुटे रहे। सभी के मन में कोरोना महामारी का खौफ साफ झलक रहा था। कई साधको का मानना है कि पहले भी तमाम राक्षसों का तांडव धरत पर हुआ। कई तरह की महामारियां देश में आई। जिसे मां विंध्यवासिनी ने ही दूर किया।चैत्र नवरात्रि की महाअष्टमी तिथि पर मंगलवार को विंध्याचल पहाड़ पर साधक महानिशा की पूजा में जुटे रहे। अर्ध रात्रि में महानिशा का पूजन किया गया। राम गया घाट, भैरव कुंड, अष्टभुजा पहाड़ की कंदराओं, गुफाओं में साधकों ने विधि-विधान से महानिशा का पूजन किया। देश के कोने-कोने से आए साधकों ने बड़े ही विधि-विधान पूर्वक भैरव कुंड रामगया घाट, तारा देवी मंदिर परिसर, अष्टभुजा पहाड़ की कंदराओं और गुफाओं में महानिशा का पूजन किया। पुलिस प्रशासन की तरफ से जगह-जगह चाक चौबंद व्यवस्था थी। महानिशा का पूजन देखने के लिए विंध्याचल सहित मिर्जापुर नगर के लोग भी बड़ी संख्या में पहुंचे। महानिशा पूजा के मद्देनजर पहाड़ पर पूरी रात चहल-पहल का माहौल रहा।
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