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देवी कूष्मांडा का दर्शन करने उमडे़ भक्त

Mon, 25 Sep 2017 12:00 AM IST
mirzapur news
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‌विंध्यवास‌िनी
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मिर्जापुर। शारदीय नवरात्र के चौथे दिन मां के दर्शन पाने को भक्तों का हुजूम उमड़ पड़ा। देश के कोने कोने से आए  चार लाख श्रद्घालुओं ने मां के दरबार में हाजरी लगाई। सूूर्य के प्रकाश से भी तेज मां कुष्मांडा के स्वरूप का दर्शन कर भक्त निहाल हो गए। मंदिर जक जाने वाली सभी गलियों में भक्तों का रेला लगा रहा। फूल मालाओं की दूकानों पर प्रसाद लेने वालों की भीड़ लगी रही। गंगा घाटों पर स्नान करने वालों का तांता लगा रहा। भक्तों के जयकारे से विंध्य धाम गूंज उठा था। चारो ओर मां के जयकारे लगाते हाथों में नारियल और सिर पर चुनरी बांधे भक्त ही दिखाई पड़ रहे थे। दर्शनार्थियों के भारी भीड़ के कारण पुलिस बल को भी खूब पसीना बहाना पड़ा।  
पिछले तीन दिनों की अपेक्षा चौथे दिन भक्तों की भारी भीड़ मां के धाम में उमड़ पड़ी। रविवार को छुट्टी होने के कारण विंध्याचल में मां के दर्शन के लिए एक दिन पूर्व ही भक्तों का आना शुरू हो गया था। मंगला आरती के समय मंदिर की सभी गलियां भक्तों से पट गईं थीं। मां की एक झलक पाने को लोग घंटों पहले से ही कतार में खड़े हो गए थे। नई वीआईपी पर सड़क तक लाइन लगी रही। दर्शन करने के लिए पट खुलते ही पूरा मंदिर परिसर मां के जयकारे से गूंज उठा। तरह तरह के फूलों से मां का श्रृंगार किया गया था। मां के अलौकिक स्वरूप को देखकर भक्त निहाल हो गए। भक्त मां की भक्ति में लीन होकर कपूर व घी का दीपक जला कर मां की आरती उतारते रहे। इस दौरान मंदिर में तिल रखने भर की जगह नहीं बची हुई थी। किसी ने झांकी से तो किसी ने गर्भ गृह से मां के दर्शन पूजन कर मंगल कामना की। दर्शनार्थियों का रेला पूरे दिन लगा रहा। वहीं भक्तों ने त्रिकोण करने के दौरान काली खोह स्थित मां काली का व पहाड़ के ऊपर विराजमान मां अष्टभुजा के दर्शन पूजन कर आशीर्वाद लिया।  धाम में विभिन्न कमेटियों के द्वारा आए हुए भक्तों के लिए शर्बत, पानी, नाश्ता व भोजन की व्यवस्था भी की गई थी। मंदिर के ठीक सामने छत पर बने खोया पाया केंद्र से बिछड़ों को परिजनों से मिलाने की आवाजें मेला क्षेत्र में गूंजती रही। केंद्र से अब तक सैकड़ों बिछड़े लोगों को मिलाया गया।  
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प्रसाद के रूप में ले जाते हैं लठियां
विंध्याचल में दर्शन पूजन करने के बाद भक्त प्रसाद के रूप में यहां से लाठी लेकर जाते हैं। मान्यता है कि विंध्य धाम की लाठियों में घुन या दीमक नहीं लगता है। बुजुर्गों के अनुुसार बहुत पहले विंध्य क्षेत्र में लाठियों की खेती की जाती थी। धाम में आने वाले भक्त अपने माता पिता के सहारे के लिए लाठी ले जाते थे। कुछ भक्त मां के धाम की लाठी ले जाकर घरों में रखते हैं, ताकि जरूरत पर काम आ सकें। धाम में लाठी बेचने वालों में अधिकतर मुस्लिम बंधु ही हैं। लाठी की दूकानों पर बेचने के पूर्व उसे तेल व हल्दी लगा कर पकाया जाता है। जिससे वह मजबूत होता है।ये लाठियां सोनभद्र के जंगलों के बांस से बनाई जाती हैं। दूकानदारों ने बताया कि प्रतिदिन सौ से डेढ़ सौ लाठियां बिक जाती हैं। दूकानदार संतोष कुमार ने बताया कि 50 रुपये से शुरु हो कर 350 रुपये तक की लाठियां बिक रही हैं। ग्रामीण क्षेत्र से आने वाले भक्त ही अधिकांश लाठियां खरीदते हैं। वे इन्हें यहां से मां का आशीर्वाद मानते हैं।
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