जिले में 1978 के दौरान आई बाढ़ के रिकार्ड को तोड़ने के करीब धीरे धीरे गंगा पहुंच रही है। दो सेंटीमीटर की रफ्तार से बढ़ रही गंगा का जलस्तर रविवार की शाम सात बजे 77.960 था जो खतरे के निशान से 236 सेंटीमीटर अधिक है। पानी बढ़ने का यही रफ्तार रहा तो एक दो दिनों के अंदर 78 में आए बाढ़ का रिकार्ड 80.34 सेंटीमीटर टूट जाएगा। लगातार बढ़ रहे जलस्तर को देखकर अधिकारियों व ग्रामीणों के होश उड़ गए हैं। सभी को सतर्क रहने का निर्देश दिया गया है।
बता दें कि एक सप्ताह के अंदर गंगा के जलस्तर में तेजी से बढ़ोत्तरी हुई है। 18 अगस्त रक्षा बंधन के दिन से गंगा जलस्तर में काफी तेजी से बढ़ोत्तरी हुई है। इसका मुख्य वजह मेजा, अदवां तथा मध्य प्रदेश के डैमों से लगभग 60 हजार रुपया क्यूसेक पानी छोड़ा जाना है। जिसके चलते 19 अगस्त को शाम चार बजे 77.220 जलस्तर रहा। 20 अगस्त को रात नौ बजे यह बढ़कर 77.630 हो गया।
21 अगस्त की सुबह आठ बजे 77.790 हो गया। दोपहर एक बजे तक यह बढ़कर 77.840 हो गया। शाम करीब सात बजे 77.940 बढ़कर पहुंच गया। जिले के छानबे, कोन, मझवां, पहाड़ी, सीखड़, नरायनपुर समेत अन्य ब्लाकों के सैंकड़ों गांव में पानी घुस गया। जिससे इन गांवों में अफरा तफरी मच गई। ग्रामीण अपने अपने सामान लेकर पलायन करने लगे। ।