कछवां। थाना क्षेत्र के बाड़ापुर गांव निवासी एलआईसी अभिकर्ता को झोलाछाप से इलाज कराना भारी पड़ गया। हालत बिगड़ने पर उन्हें उपचार के लिए बीएचयू ले जाया गया। जहां उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। बीएचयू के डाक्टर ने पूर्व में गलत इलाज की बात कही। परिजनों ने झोलाछाप पर गलत इलाज का आरोप लगात हुए कार्रवाई की मांग की।
बाड़ापुर गांव निवासी 56 वर्षीय संतोष कुमार सिंह भारतीय जीवन बीमा के चुनार शाखा से अभिकर्ता थे। उनको अचानक आठ सितंबर को बुखार और खांसी की शिकायत हुई तो वह कनकसंराय गांव में झोलाछाप के यहां इलाज कराने गए। जांच रिपोर्ट में टाइफाइड आया। इसके बाद झोलाछाप ने इलाज शुरु कर दिया। दो दिन लगातार पानी चढ़ाना और तमाम दवाइयां दी। 10 सितंबर को अचानक संतोष की तबीयत बिगड़ गई। उनकी सांस फूलने लगी और पेट दर्द होने लगा। परिजन कछवां क्रिश्चियन अस्पताल ले गए। वहां डाक्टरों ने कोरोना के लक्षण की बात कहकर वाराणसी रेफर कर दिया। परिवार के लोग वाराणसी स्थित सरसुंदर लाल अस्पताल ले गए। जहां कोरोना टेस्ट के बाद रिपोर्ट निगेटिव आई। इलाज शुरू हुआ तो डाक्टरों ने बताया कि फेफड़ा संक्रमित हो गया है। इलाज के दौश्रान उनकी मौत हो गई। संतोष के पुत्र ऋषभ का ने बताया कि बीएचयू के डाक्टरों के अनुसार फेफड़े में पानी होने से फेफड़ा संक्रमित हो गया था। इससे सांस लेने में कठिनाई हो रही थी। बीएचयू आने से पहले इलाज गलत हुआ। मांग किया कि झोलाछाप के खिलाफ कार्रवाई की जाए।