मदरसा अरबिया का सलाना जश्न दस्तारे फरागत (उपाधि वितरण समारोह) शानो-शौकत से मनाया गया। समारोह की अध्यक्षता खलीफा हुजूर मुफ्ती आजमे हिंद मुफ्ती गुलाम यासीन काली शहर बनारस ने की। शायरों ने सुरीली आवाजाें से लोगों का दिल जीत लिया। समारोह में छह को हिफ्ज, तीन को कारी, पांच को आलमियत सहित 14 बच्चाें को दस्तार बांधकर सम्मानित किया गया।
समारोह के दौरान शायर ताज बनारसी ने हम लोग हुसैनी है, जिस शहर में जाते है, दुनियां से अलग अपनी पहचान बनाते हैं..पेश कर समां बांध दिया। समन सिंगरौलवी ने आफताब से पूछा क्यों पलटकर आया तू आफताब ने बोला कि हुक्म था पयंबर का..सुनाकर मन मोह लिया। फरीद साबरी ने जब भी कुरआन मैने सामने रखकर खोला, यूं लगा जैसे किसी ने खुद अपना मुकद्दर खोला..प्रस्तुत कर खूब वाहवाही लूटी।
फैयाज भदोहवीं ने अपने फन का जादू बिखेरा, वहीं मोकर्ररीन में हजरत अल्लामा मौलाना अबुल हक्कानी ने अपने खिताब से लोगाें के दिलों को रोशन करने का प्रयत्न किया। अल्लामा मौलाना शफी अहमद बनारसी ने अपने नूरानी बयान से लोगों को नसीहत देते हुए अपने जिंदगी में बदलाव और सीधे रास्ते पर चलने का पैगाम दिया। उपाधि वितरण समारोह के दौरान मदरसा अरबिया के प्रधानाचार्य मौलाना नजम अली ने छह बच्चाें को हिफ्ज, तीन को कारी एवं तीन बच्चाें को आलमियत सहित 14 बच्चे को दस्तार बांधकर जिंदगी को जिम्मेदारियों के साथ निभाने की नसीहत दी।
हजरत अल्लामा गुलाम यासीन की दुआ पर जलसा का समापन हुआ। इस दौरान वित्त एवं लेखाधिकारी बेसिक रईस अहमद, मुफ्ती अब्दुल खालिक, शफीक अहमद खान, कासिम हुसैन, अशफाक अहमद, मु. अकरम कुरैशी, गुलाम हैदर, मौ. जर्रार अली अशरफी, कारी कमरुज्जा, मौ. हिफाजत हुसैन, मौ. शमशुद्दीन, मौ. नूरुल इस्लाम, मौ. अब्दुल हलीम, मौ. सालिक हुसैन, मौ. इबादत हुसैन, मौ. नेशात आलम, सरफराज अहमद, हाजी मो. इस्माइल खान आदि मौजूद रहे।