जिले में स्थापित किए गए अधिकांश क्रशर व कटर प्लांट सीज होने के बावजूद अधिकारियों की मिली भगत के चलते धड़ल्ले से संचालित हो रहे हैं। खनन माफिया शासन की आंखों में धूल झोंक कर प्रतिमाह उसे करोड़ों रुपये के राजस्व की क्षति पहुंचा रहे हैं फिर भी ऐसे लोगों पर कार्रवाई नहीं हो पा रही है।
तत्कालीन जिलाधिकारी गोविंद राजू ने वर्ष 2013 के दौरान मानकों को ताक पर रख कर संचालित क्रशर व कटर प्लांट की जांच कर उनके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करने की थी। एडीएम के नेतृत्व में एसडीएम, सीओ समेत खनिज विभाग की एक टीम गठित की गई थी। गठित टीम को 10 से अधिक बिंदुओं पर जांच करने का निर्देश दिया था। बिंदुओं को पूरा नहीं करने पर उनको सीज करने का निर्देश दिया था।
जिसके बाद दो क्रशर प्लांट को छोड़ कर सारे सीज कर दिए गए। कुछ दिनों तक सारे प्लांट बंद रहे लेकिन अधिकारियों की मिलीभगत कर प्लांट मालिक उन्हें चलाने लगे। जिले में 42 क्रशर प्लांट में से मजह चार मानक के अनु़रूप हैं। अधिकांश प्लांट मानक को पूरा नहीं कर पाए हैं। कागजों पर तो यह प्लांट सीज हैं लेकिन हकीकत में वह चल रहे हैं।
अधिकारियों की मिलीभगत के चलते हो रहे अवैध खनन व ब्लास्टिंग के चलते गत दिनों देवरी कला गांव में हुए विस्फोट में दो मजदूरों की जान चली गई थी। फिर भी जिला प्रशासन नहीं चेता। अभी भी मड़िहान के कई सीज क्रशर प्लांट व क्रशर प्लांट संचालित हो रहे हैं वहीं कई अवैध लीजों पर धड़ल्ले से खनन व ब्लास्टिंग की जा रही है।
खनन अधिकारी जेपी द्विवेदी का कहना है कि अवैध खनन की शिकायत मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।जिलाधिकारी राजेश कुमार सिंह ने कहा किपड़री के एक अवैध क्रशर प्लांट की शिकायत मिली थी। जांच करने को कहा गया है। ऐसी और भी शिकायतें मिलीं तो कार्रवाई होगी।