जिले के बारहों ब्लाकों में रबी की फसल अन्नदाताओं के घर में पहुंचने के लिए तैयार थी, लेकिन रविवार और सोमवार को अतिवृष्टि व ओलावृष्टि ने कृषकों के अरमानों पर पानी फेर दिया। किसान फसलों को घरों में पहुंचाने के लिए अपने खलिहानों की साफ-सफाई कर रहे थे तो कुछ किसान अपने खलिहानों में दलहनी-तिलहनी की फसलों को काट कर मड़ाई करने की तैयारी में थे । इन सबके बीच रविवार को अचानक मौसम खराब हो गया। ओलावृष्टि और तेज हवा के साथ झमाझम बारिश से खेतों में खड़ी फसल जमींदोज हो गई जिससे किसान दहल गए।
जिगना संवाददाता के अनुसार क्षेत्र के चेहरा, पाली, रसौली, बरहा खुर्द, सुमतिया, बघौरा, नरोईया, नीबी, नौगांव सहित दर्जनों गांवों में तीन चक्र में हुई बारिश एवं ओलावृष्टि से गेहूं सहित मटर, मसूर, अरहर, सरसो आदि की फसलें बर्बाद हो गई हैं। किसान रमेश सिंह, शशिभूषण पाठक, विजय कुमार, भूपेंद्र शुक्ल, अशोक शुक्ल आदि का कहना है कि किसानों को अभी तक अतिवृष्टि व सूखा का मुआवजा नहीं मिल पाया था कि तेज बारिश और ओलावृष्टि होने से इस बार भी तैयार फसलें चौपट हो गईं।
लालगंज में बसहीं, जगदीशपुर, लालापुर, बस्तरा, बलिया, निनवार, खजुरी, रजई कटाई, बेलहा, तुलसी, लहंगपुर सहित दर्जनों गांवाें में चना, अरहर, मसूर सहित गेहूं की फसल चौपट हो गई। क्षेत्र के दिनेश श्रीवास्तव, इंदरपाल, रामायण तिवारी, दयाशंकर पांडेय, रमाशंकर मिश्र आदि किसानों का कहना है कि किसी तरह खेतों में फसलों को उगाया गया था, जब फसल तैयार हुई जो सोमवार की सुबह बारिश और ओलावृष्टि से सब कुछ बर्बाद हो गया।
सीखड़ः रविवार की रात से सोमवार की भोर तक झमाझम बारिश से गेहूं की खड़ी फसल चौपट हो गई है। क्षेत्र के किसान अभी मटर व मिर्च की बर्बाद हुई खेती से उबरे नहीं थे कि बेमौसम बारिश से उनके खेतों में खड़ी गेहूं की फसल चौपट हो गई। प्रमोद सिंह, उमेश पांडेय, जितेंद्र सिंह, रमेश सिंह, रमेश पाठक, चंद्रशेखर पांडेय, मीतू सिंह आदि किसानों का कहना है कि खून पसीने की कमाई सोमवार को हुई तेज बारिश में बह गई।