पिछले चौदह वर्षों से जिले में अवैध खनन जारी है। खनन माफिया, अधिकारियों की मिलीभगत से पहाड़ों को खोखला कर चुके हैं। इसके चलते खनन स्थल गहरा होकर तालाब में तब्दील हो गए हैं। माफिया शासन को करोड़ों के राजस्व का चूना भी लगा चुके हैं।
जिले के अहरौरा, मड़िहान, पड़री, चुनार, अदलहाट, हलिया और लालगंज तथा छानबे इलाके में मिर्जापुर, बनारस, इलाहाबाद, भदोही, गाजीपुर, बलिया, मऊ, जौनपुर समेत अन्य स्थानों के खनन माफिया धड़ल्ले से अवैध खनन करा रहे हैं।
पिछले चौदह वर्ष से यह खेल जारी है। बताया जाता है कि इसमें खनिज विभाग और प्रशासन के अधिकारी भी शामिल हैं। कुछ सफेदपोशों का भी इनको शह है। इन सभी को सुविधा शुल्क मुहैया कराया जाता है। कई स्थलों पर लीज न होने के बाद भी खनन हो रहा है।
कई पट्टा धारकों की लीज कहीं और है लेकिन खनन कहीं और कराया जा रहा है। मड़िहान इलाके में ज्यादा खनन होने के कारण दो दर्जन से अधिक स्थान तालाब में तब्दील हो चुके हैं। इनकी रायल्टी जमा कराई जाए तो करोड़ों रुपये शासन को मिले।
लोगों का कहना है कि जांच के नाम पर अधिकारी केवल खानापूरी कर रहे हैं। सूत्रों की मानें तो अवैध क्रशर प्लांट, अवैध लीज तथा अवैध परिवहन से वसूली की जाती है। खनन माफिया अधिकारियों को सुविधा शुल्क देकर खुद भी महीने में लाखों कमा रहे हैं।