न्यायालय फास्टट्रैक कोर्ट पीएन श्रीवास्तव ने हत्या के मामले की सुनवाई बुधवार को छह लोगों को दोषसिद्ध पाए जाने पर आजीवन कारावास की सजा सुनाते हुए जेल भेज दिया। वहीं इसी मामले के क्रास केस में साक्ष्य के अभाव में 17 लोगों को बरी कर दिया। घटना को देखते हुए दूसरे भी पुलिस अधीक्षक अरविंद सेन फोर्स के साथ न्यायालय में डटे रहे।
अभियोजन के अनुसार कछवां थाना क्षेत्र के तिवारीपुर गांव निवासी एवं वादी मुकदमा राकेश दूबे के घर के सामने चकरोड पर ग्राम प्रधान उमा बिंद नौ जुलाई 2011 की सुबह मनरेगा योजना के तहत खड़ंजा लगवा रहा था। इसी दौरान गांव के चंद्रभूषण दूबे व त्रिपुरारी दूबे पहुुंचे और वादी राकेश दूबे के पिता छट्ठम दूबे से जमीन के विवाद को लेकर नोकझोंक करने लगे। आरोप है कि त्रिपुरारी दूबे अपने हाथ में लाइसेंसी बंदूक तथा उनका पुत्र प्रकाश दूबे कट्टा, पिंटू दूबे लाठी लेकर, रामनरेश का पुत्र मिंटू, चंद्रभूषण का पुत्र प्रशांत उर्फ सोनू, अमरनाथ का पुत्र तारकेश्वर दूबे लामबंद हो कर खड़ंजा बनाने से रोकने लगे।
विरोध जताने पर फायरिंग शुरू कर दी। जिसमें वादी मुकदमा राकेश दूबे की पत्नी मीरा देवी की गोली लगने से मौत हो गई थी जबकि 12 अन्य को चोटें आई थीं। इस मामले में पुलिस ने संबंधित धाराओं में मुकदमा पंजीकृत किया था। पुलिस ने विवेचना कर सभी के खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय में दिया था। अभियोजन की ओर से सहायक शासकीय अधिवक्ता फौजदारी रविंद्र कुमार सिंह तथा बिहारी प्रसाद सिंह ने दस गवाह प्रस्तुत कराये। जिसकी सुनवाई मंगलवार को गई थी।
सजा के बिंदु पर बुधवार को सुनवाई की गई। कोर्ट ने सगे भाई त्रिपुरारी व तारकेश्वर पुत्रगण अमरनाथ, प्रकाश दूबे उर्फ वेदप्रकाश, पिंटू उर्फ बृजेश दूबे पुत्रगण त्रिपुरारी, प्रशांत दूबे पुत्र चंद्रभूषण दूबे, मिंटू पुत्र पुत्र रामनरेश को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही प्रत्येक 42 हजार रुपये के अर्थदंड से भी दंडित किया। इसी मुकदमे के दौरान क्रास केस में 17 आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया। जिन्हें मंगलवार को ही छोड़ दिया गया। आरोपित कुल अर्थदंड दो लाख 52 हजार रुपया में से मृतका मीरा देवी के पति राकेश दूबे को दो लाख रुपये बतौर क्षतिपूर्ति प्रदान किया जाएगा। शेष धनराशि राजकोष में जमा होगी।