अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (प्रथम) मनोज कुमार द्वितीय ने गबन करने व साक्ष्य को मिटाने के आरोपी लोक सेवक संकठा प्रसाद सिंह को दोषसिद्ध पाते हुए दो वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई। साथ ही 60 हजार रुपये के अंर्थदंड से भी दंडित किया।
अभियोजन के अनुसार, जिला कृषि अधिकारी जवाहरलाल उपाध्याय ने 12 नवंबर 1980 को आरोपी राजकीय कृषि बीज भंडार चील्ह में सहायक कृषि निरीक्षक प्रभारी संकठा प्रसाद के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। जिसमें उसने भंडार में कार्य करते हुए राजकीय खाद्य सामग्री अवैध तरीके से विक्रय करके कुल दो लाख दो हजार 154 रुपया 80 पैसे का गबन कर लिया था।
अपराध से बचने के लिए उक्त भंडार से संबंधित सभी मूल कागजातों को गायब कर वह फरार हो गए। खंड विकास अधिकारी कोन द्वारा अनेक पत्र भेजने के बाद भी संकठा प्रसाद उपस्थित नहीं हुए थे।
पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर आरोप पत्र न्यायालय में दिया था। सन 1985 में प्रथम अतिरिक्त मुंसिफ मजिस्ट्रेट मोतीलाल द्वारा 28 अक्तूबर 1985 को आरोपी के खिलाफ चार्ज बनवाया था। संयोग से मोतीलाल के सुपुत्र वर्तमान पीठासीन अधिकारी मनोज कुमार सिंह द्वितीय ने मुकदमे की सुनवाई की।
अभियोजन की तरफ से अभियोजन अधिकारी विजय कुमार सरोज ने न्यायालय में कुल सात गवाहों को पेश किया। न्यायालय ने साक्ष्यों और वकीलों की बहस सुनने के बाद आरोपी लोक सेवक संकठा प्रसाद सिंह को दोषी पाते हुए दो वर्ष के कठोर कारावास तथा 60 हजार रुपया अर्थदंड से दंडित किया।