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यूपी: तीन दिन से भूखे पेट पढ़ रहे थे बच्चे, और रजिस्टर में लिख दिया समय पर बन रहा मिड डे मील

Sat, 05 Oct 2019 05:32 PM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मिर्जापुर
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स्कूल में जांच करने पहुंची टीम। - फोटो : अमर उजाला
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मिर्जापुर जिले के जोगी भोगी गांव के प्राथमिक विद्यालय में तीन दिन से मिड डे मील न बनने के मामले में सीडीओ प्रियंका निरंजन के आदेश पर शनिवार को टीम जांच-पड़ताल करने पहुंची। टीम में डीसी एमडीएम रविंद्र मिश्रा, वीडियो मझवा घनश्याम प्रसाद, प्रभारी खंड शिक्षा अधिकारी प्रेमशंकर (सीखड़) शामिल थे।

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जांच में पाया कि तीन दिन से प्राथमिक विद्यालय में एमडीएम(मिड डे मील) नहीं बन रहा था। जिला समंवयक एमडीएम अरविंद मिश्रा ने बताया कि पूर्व माध्यमिक विद्यालय सिल्पी का विलय हो चुका है। प्रभारी प्रधानाध्यापिका श्रेया सिंह 29 जुलाई से मातृत्व अवकाश पर चली गई हैं, साथ ही अध्यापिका सोनम सिंह भी 13 अगस्त से मातृत्व अवकाश पर हैं।

इसके चलते प्राथमिक विद्यालय में मात्र एक शिक्षामित्र रीता देवी द्वारा अपने पैसे से एमडीएम फल दूध का वितरण किया जा रहा था। 30 अक्टूबर को शिक्षामित्र ने प्रभारी खंड शिक्षा अधिकारी प्रेम शंकर राम को पत्र लिखकर मिड डे मील के तहत भोजन बनवाने में असमर्थता जाहिर की थी। इसके बाद प्रभारी खंड शिक्षा अधिकारी(सीखड़) ने सीखड़ के अध्यापक रत्नेश्वर को लिखित आदेश देकर विद्यालय ज्वाइन करने के लिए कहा था लेकिन रत्नेश्वर ने प्राथमिक विद्यालय जोगी भोगी को ज्वाइन नहीं किया।

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पूर्व माध्यमिक विद्यालय की प्रभारी प्रधानाध्यापिका आशा देवी को जिम्मेदार ठहराया गया कि विद्यालय संबिलय होने के बाद उनकी जिम्मेदारी खाना बनवाने की थी, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। शिक्षामित्र अनीता ने एमडीएम ना बनने के बाद रजिस्टर में बच्चों को तीन दिन मिड डे मील खिलाए जाने की बात रजिस्टर में लिख दी।

अधिकारियों के पूछे जाने पर उसने बताया कि तीन दिन एमडीएम नहीं बना था। गलती से मेरे द्वारा अंकित हो गया है, वहीं पूर्व माध्यमिक विद्यालय की प्रभारी प्रधानाध्यापिका आशा देवी का कहना है कि मुझे कोई लिखित आदेश विभाग द्वारा नहीं दिया गया है, जिसके चलते मुझे दोनों विद्यालय के विलय की जानकारी नहीं हो पाई। अगर जानकारी होती तो मै प्राथमिक विद्यालय के बच्चों को भी एमडीएम बनवाकर खिला देती।
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जांच में आए मझवा वीडियो घनश्याम प्रसाद के यह कह देने पर कि तीन दिन खाना नहीं मिला तो पहाड़ टूट गया। इस पर ग्रामीण आक्रोशित हो गए। मामले को बढ़ता देख वीडियो को अपनी बात बदलनी पड़ी।

डीसी एमडीएम रविंद्र मिश्रा बाताया कि जांच में पूर्व माध्यमिक विद्यालय की प्रधानाध्यापिका आशा देवी और प्राथमिक विद्यालय की शिक्षामित्र रीता देवी दोषी हैं। उन्होंने विद्यालय संविलियन होने के बाद प्राथमिक विद्यालय के बच्चों को एमडीएम नहीं खिलाया। इसके साथ ही शिक्षामित्र ने तीन दिन एमडीएम न बनने के बाद भी रजिस्टर में बच्चों को एमडीएम खिलाए जाने की संख्या दर्ज कर दी, जोकि यह घोर लापरवाही है। उन्होंने कहा कि जांच कर सीडीओ प्रियंका निरंजन मैडम को अवगत करा दिया जाएगा।
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