पूर्व माध्यमिक विद्यालय की प्रभारी प्रधानाध्यापिका आशा देवी को जिम्मेदार ठहराया गया कि विद्यालय संबिलय होने के बाद उनकी जिम्मेदारी खाना बनवाने की थी, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। शिक्षामित्र अनीता ने एमडीएम ना बनने के बाद रजिस्टर में बच्चों को तीन दिन मिड डे मील खिलाए जाने की बात रजिस्टर में लिख दी।
अधिकारियों के पूछे जाने पर उसने बताया कि तीन दिन एमडीएम नहीं बना था। गलती से मेरे द्वारा अंकित हो गया है, वहीं पूर्व माध्यमिक विद्यालय की प्रभारी प्रधानाध्यापिका आशा देवी का कहना है कि मुझे कोई लिखित आदेश विभाग द्वारा नहीं दिया गया है, जिसके चलते मुझे दोनों विद्यालय के विलय की जानकारी नहीं हो पाई। अगर जानकारी होती तो मै प्राथमिक विद्यालय के बच्चों को भी एमडीएम बनवाकर खिला देती।
जांच में आए मझवा वीडियो घनश्याम प्रसाद के यह कह देने पर कि तीन दिन खाना नहीं मिला तो पहाड़ टूट गया। इस पर ग्रामीण आक्रोशित हो गए। मामले को बढ़ता देख वीडियो को अपनी बात बदलनी पड़ी।
डीसी एमडीएम रविंद्र मिश्रा बाताया कि जांच में पूर्व माध्यमिक विद्यालय की प्रधानाध्यापिका आशा देवी और प्राथमिक विद्यालय की शिक्षामित्र रीता देवी दोषी हैं। उन्होंने विद्यालय संविलियन होने के बाद प्राथमिक विद्यालय के बच्चों को एमडीएम नहीं खिलाया। इसके साथ ही शिक्षामित्र ने तीन दिन एमडीएम न बनने के बाद भी रजिस्टर में बच्चों को एमडीएम खिलाए जाने की संख्या दर्ज कर दी, जोकि यह घोर लापरवाही है। उन्होंने कहा कि जांच कर सीडीओ प्रियंका निरंजन मैडम को अवगत करा दिया जाएगा।