मिर्जापुर। विंध्याचल के बभनी में दहेज में बाइक नहीं मिलने पर बहू को आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में अपर सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट देवकांत शुक्ला ने पति, ससुर और सास को दोष सिद्ध पाते हुए प्रत्येक को दस वर्ष की कैद की सजा सुनाई। साथ ही प्रत्येक पर 40-40 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया।
अभियोजन अनुसार जिगना थाना क्षेत्र के नगवासी गांव निवासी वादी लालबहादुर यादव पुत्र रामलेखावन ने अपनी पुत्री वंदना यादव की शादी 11 जून 2011 को विंध्याचल थाना क्षेत्र के बभनी निवासी प्रेम सागर के पुत्र पवन यादव के साथ की थी। अपने सामर्थ अनुसार डेढ़ लाख रुपये का सामान भी दिया था लेकिन ससुराली खुश नहीं थे। दहेज में मोटर साइकिल की मांग को लेकर ससुराली उसकी पुत्री को प्रताड़ित करने लगे। वंदना ने मायके वालों को प्रताड़ना की जानकारी दी थी। आरोप है कि 12 मार्च 2015 को वंदना की झुलसने से मौत हो गई। ससुरालियों ने इसकी सूचना मायके वालों को नहीं दी। पड़ोसियों से सूचना मिलने पर वंदन के पिता पहुंचे और पुलिस के उच्चाधिकारियों को अवगत कराया लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद उसने न्यायालय में 156 तीन के तहत परिवाद दाखिल कर आरोपियों के विरुद्घ मुकदमा दर्ज कराए जाने की गुहार लगाई। न्यायालय ने आरोपियों के विरुद्घ मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया। इसके बाद विंध्याचल पुलिस ने 498 ए, 3/4 डीपी एक्ट व 306 आईपीसी के तहत मुकदमा दर्ज कर आरोप पत्र न्यायालय में दिया था। अभियोजन की ओर से सहायक शासकीय अधिवक्ता फौजदारी राजेश यादव ने सात गवाह प्रस्तुत कराए। पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्य व गवाहों के बयान के आधार पर न्यायालय ने पति पवन यादव, ससुर प्रेम सागर तथा गरोदा देवी को बहू को आत्महत्या के लिए प्रेरित करने के आरोप में दोषसिद्घ पाए जाने पर दस वर्ष की कड़ी कैद की सजा सुनाई। साथ ही प्रत्येक को 40-40 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित कर जेल भेज दिया।