शेरवां (मिर्जापुर)। सरकारी जमीन से अवैध कब्जा हटाने का सरकार का आदेश बेअसर साबित होता दिख रहा है। विकास खंड जमालपुर के 99 ग्राम पंचायत में सरकारी अभिलेखों पर ध्यान दें तो कुल 343 तालाब खोदे गए हैं। जिसपर राजस्व विभाग ने भी 80 तालाब पर अतिक्रमण माना है। बावजूद अतिक्रमण हटाने में सरकारी अमला नाकाम हैं। वर्ष 2000 में चकबंदी के दौरान छोड़ी गयी सरकारी जमीन, नाली, चकरोड, तालाब, बावली, बीजगोदाम, स्कूल के लिए छोडी गयी जमीन सहित कुम्हर गड्ढा व खलिहानों पर भू-माफियाओं द्वारा कब्जा किया जा रहा है। राजस्व विभाग द्वारा कब्जा हटाने के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की जा रही है। थाना दिवस व तहसील दिवस पर जिलाधिकारी के यहां ग्रामीण फरियाद करके थक गए हैं। इनकी सुनने वाला कोई नहीं है। क्षेत्र के पुरानी पुलिस चौकी के पास दर्जनों लोगों ने सरकारी जमीन पर कब्जा कर लिया है। शेरवां गांव के सरकारी जमीन पर दबंगों का कब्जा है। सेमरां गांव के मंदिर के पास 70 के दशक में टेस्ट वर्क प्लान व काम के बदले अनाज योजना अंतर्गत साढ़े पांच बीघा में खोदा गया तालाब अतिक्रमण के चलते सिकुड़ कर दस बिस्वे में हो गया है। एक माह पूर्व उपजिलाधिकारी चुनार द्वारा भभौरा गांव में चौपाल के दौरान कहा था कि अतिक्रमणकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। भाईपुर कला गांव के कन्या पाठशाला, बीजगोदाम, तालाब, बावली, नाला, नाली, चकरोड के लिए जमीन छोड़ी गई है, जिस पर कुछ लोगों ने कब्जा जमा लिया है। सेमरां, ओडी, सिकन्दरपुर, सहिजनी समेत दर्जनों तालाब अपनी-अपनी पहचान को खोते जा रहे हैं। क्षेत्र के आलोक श्रीवास्तव, लकी द्विवेदी, संतोष सिंह, दिनेश यादव, डब्बू चौबे, शरणशंकर चतुर्वेदी, पारस नाथ यादव, दीपक सिंह, आदि ने सरकारी जमीनों से अवैध कब्जा हटाने के लिए अभियान चलाए जाने की मांग जिलाधिकारी से की है।