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पति की हत्या में पत्नी समेत तीन को उम्र कैद

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मिर्जापुर। न्यायालय अपर सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट देवकांत शुक्ला ने पति की हत्या के जुर्म में पत्नी सहित दो अन्य को आजीवन कारावास की सजा बुधवार को सुनवाई। इसके साथ ही न्यायालय ने प्रत्येक को 15-15 हजार रुपये के अर्थदंड लगाया है।
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अभियोजन अनुसार मड़िहान थाना क्षेत्र के पड़रिया गांव निवासी कल्लू कोल ने 27 जून 2007 को रिपोर्ट लिखाई कि उसका लड़का राजेंद्र करीब आठ माह से अपनी ससुराल निकरिका गांव में अपनी पत्नी रूना देेवी के साथ रह रहा था। 18 मई 2007 की रात उसके लड़के की मौत उसके ससुराल में हो गई थी। उसी दिन उसकी चचेरी चाची धनपत्ती निकरिका गांव रहने वाले अपने बहनोई मिश्री लाल के यहां गई थी। रात दस बजे अचानक राजेंद्र शोर मचाने लगा। उसकी आवाज सुन कर उसकी चाची धनपत्ती व उसका बहनोई मिश्री लाल उसके ससुराल पहुंचे तो वहां से गांव सियाराम कोल उर्फ मेघा व बुल्ला उर्फ लक्ष्मण कोल को निकल कर भागते देखा। धनपत्ती राजेंद्र की पत्नी रूना से इस बारे में पूछने पर उसने कोई जवाब नहीं दिया। 19 मई कोे सुबह पांच बजे धनपत्ती राजेंद्र के ससुराल गई तो रूना ने बताया कि राजेंद्र ने बांस में फांसी लगा कर आत्महत्या कर ली है। पूछताछ में जानकारी मली कि रूना का गांव के सियाराम व बुल्ला से अवैध संबंध था। विरोध करने पर उन्होेंने राजेंद्र की 18 मई की रात उसकी हत्या कर दी। उसे आत्महत्या का रूप देने के लिए लाश को बांस से लटका दिया। रूना देवी, सियाराम कोल व तथा बुल्ला के खिलाफ पुलिस ने आरोपपत्र दायर किया। बुधवार को मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन की तरफ से सहायक शासकीय अधिवक्ता फौजदारी राजेश यादव आठ गवाह प्रस्तुत कराये। न्यायालय ने तीनों आरोपियों को दोष सिद्ध पाते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही प्रत्येक को 15-15 हजार रुपये के अर्थदंड लगाया। जुर्माने की आधी राशि राजेंद्र के पिता कल्लू कोल को देने का आदेश दिया।
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