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साम्प्रदायिक सौहार्द- मुसलिम बनाते हैं चुनरी

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विन्ध्याचल। विंध्याचल में चढ़ाई जाने वाली चुनरी में हिंदुओं की आस्था है। और इसे बनाने में मुस्लिमों की मेहनत। विंध्याचल से सटे कंतित कस्बे में मुस्लिम कारीगरों के लिए चुनरी आर्थिक स्रोत का जरिया है। पूरा परिवार ही इस काम में जड़कर रोजीरोटी कमा रहा।
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कारीगर यासीन अली बताते हैं कि नवरात्र मेले की वजह से उनकी आर्थिक स्थिति को बल मिलता है। नवरात्र शुरू होने से पहले ही मुस्लिम परिवार पूरी तन्मयता से चुनरी बनाने की तैयारी में जुट जाता है। करीब एक माह पहले ही चुनरी को आकर्षक ढंग से काटने सिलने व कारीगरी में पूरा परिवार लग जाता है। लाखों की तादात में देश के कोने-कोने से भक्त जगतजननी माता विंध्यवासिनी के दरबार में हाजिरी लगाने के लिए आते हैं। माला फूल, नारियल व अन्य चढ़ावे के साथ ही चुनरी चढ़ाते हैं। कई इसे चढ़ाने के बाद आशीर्वाद स्वरूप घर भी ले जाते हैं। भक्तों की भारी तादात व आस्था के आगे माता को पसंद चुनरी कम न पड़ जाय इसके लिए मुस्लिम समुदाय दिन रात चुनरी बनाने में लगा रहता है। माता विंध्यवासिनी को प्रेम श्रद्धा के साथ अर्पित किये जाने वाली चुनरी को कई पीढ़ियों से बनाने का कम मुस्लिम समुदाय करता आ रहा है। जिस आस्था के साथ हिन्दू जगत जननी को चुनरी चढ़ाते है, उसी मेहनत से मुसलमान चुनरी बनाते हैं। विन्ध्याचल के नवरात्र मेले का इंतजार न सिर्फ माँ के द्वार मत्था टेकने वाले भक्तों को होता है बल्कि आर्थिक सहारा पाने वाले मुस्लिम परिवारों को भी रहता है।
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