दिनोंदिन जलस्तर घटने से गंगा किनारे के लोगाें की जान में जान आ रही है। बाढ़ राहत शिविरों से लोगों का वापस अपने घरों में लौटने का सिलसिला शुरु हो गया है। बाढ़ राहत शिविरों में अब बहुत कम ही लोग बचे हैं जिनके घर बाढ़ से नष्ट हो गए हैं। उधर गंगा घाटों पर भी रौनक लौटने लगी है। मल्लाह और घाटों के किनारे रहने वाले लोगाें ने प्रशासन के रुख का इंतजार न करते हुए खुद ही घाटों पर से गंगा के गाद को साफ करने की पहल शुरु कर दी है।
गंगा का जलस्तर मंगलवार की रात आठ बजे 74.140 सेंटीमीटर रहा। खतरे के निशान से अब गंगा दूर होती चली जा रही हैं। तीन सेंटीमीटर प्रति घंटा की दर से गंगा के पानी में घटाव हो रही है। इससे प्रशासनिक अधिकारियों ने भी अब बाढ़ पर से लगभग अपनी नजर हटा ली है। बाढ़ में राहत सामग्री बांटने वालों की भी कवायद लगभग समाप्त हो गई है। गांवों से पानी तो दूर चला गया है लेकिन दुर्गंध और सड़कों की खराब दशा के कारण मुसीबत को झेलना पड़ रहा है।
कीचड़ और सिल्ट से रास्तों पर चलना मुश्किल है। उसकी सफाई नहीं होने से बीमारियों के फैलने का खतरा भी बना है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन का ध्यान आकृष्ट कराते हुए मलबा हटाने और सड़कों को दुरुस्त कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि कीटनाशक दवाओं का भी छिड़काव कराना चाहिए क्योंकि सड़ांध से बीमारियों के फैलने की आशंका पैदा हो गई है।