गुरुवार की सुबह नगर सहित जनपद के ग्रामीण अंचलों में घने कोहरे की चादर फैली हुई नजर आई। जैसे-जैसे दिन चढ़ता गया वैसे-वैसे कोहरा तो छटा, लेकिन भगवान भास्कर के दर्शन न देने से दिन भर गलन-ठिठुरन बरकरार रहा। गणेश चतुर्थी पर्व होने के चलते बाजारों में फल-फूल सहित पूजन सामग्री खरीदने के लिए लोगाें की भीड़ जुटी रही।
नववर्ष से बदले मौसम का मिजाज दो दिन पूर्व ठीक हो गया था, लेकिन गुरुवार की सुबह अचानक मौसम के करवट लेने से शीतलहर पुन: वापस आ गई। कड़ाके की पड़ रही ठंड के बावजूद न तो नगर क्षेत्र और न ही ग्राम्यांचलाें में ही अलाव जलवाने की कोई व्यवस्था जिला व पालिका प्रशासन द्वारा दिखाई दे रही है।
मिर्जापुर रेलवे स्टेशन परिसर और बस स्टैंड परिसर में जहां अलाव न जलवाने से यात्रियाें को ठिठुरना पड़ा, वहीं विंध्याचल सहित नगर के कई बाजाराें और चौराहाें पर अलाव जलवाए जाने का कार्य सिर्फ कागज पर ही चल रहा है।
शिक्षण संस्थानों के खुले होने के कारण नौनिहालाें को कड़ाके की ठंड में ठिठुरना पड़ा। सांयकाल घने कोहरे की चादर ने एक बार फिर नगर को अपने चपेट में ले लिया, जिससे नगर के प्रमुख बाजाराें एवं सड़काें पर चहुंओर सन्नाटा पसर गया।
शीतलहर चलने से जहां एक ओर सड़काें से रिक्शे और आटो वाले गायब दिखे, वहीं जगह-जगह प्राइवेट स्तर पर अलाव जलवाकर लोग तापते देखे गए।