रोडवेज परिसर मिर्जापुर। स्रोत- संवाद
मिर्जापुर। आस-पास के क्षेत्र व जिलों में आवागमन करने के लिए सबसे सुलभ परिवहन का साधन रोडवेज बसें होती है। यहां प्रतिदिन हजारों लोग यात्रा करते हैं। इसे देखते हुए तीन साल पहले रोडवेज को एयरपोर्ट की तर्ज पर सुविधा देने का प्रस्ताव तैयार किया गया। दो वर्ष पहले कैबिनेट की मंजूरी मिली। छह महीने पहले टेंडर प्रक्रिया भी पूरा हुआ पर अब तक कायाकल्प शुरू नहीं हो सका है।
मिर्जापुर रोडवेज परिसर में न तो बैठने की बेहतर व्यवस्था है और न ही पर्याप्त रोशनी व पीने के पानी की व्यवस्था है। बसें खड़ी करने के लिए शेड नहीं है। कार्यालय भवन भी जर्जर हालत में है।
रोडवेज बस अड्डे पर आने वाले यात्रियों को एयरपोर्ट जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं देने के लिए पब्लिक-प्राइवेट-पार्टनरशिप (पीपीपी) के तहत बस अड्डे का कायाकल्प किया जाना है। प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने अक्तूबर 2023 में कैबिनेट की बैठक में भी एयरपोर्ट की तर्ज पर मिर्जापुर बस अड्डे के निर्माण को मंजूरी दे दी गई है।
मिर्जापुर रोडवेज परिसर 13 हजार 845 वर्ग मीटर क्षेत्र में है। इसमें वर्कशॉप, कार्यालय और आठ भवन हैं। उप निबंधक ने जमीन और भवन की कीमत का मूल्यांकन किया है। जमीन और भवन को मिलाकर 50 करोड़ का मूल्यांकन हुआ है।
दो साल पहले इसकी रिपोर्ट परिवहन निगम के मुख्यालय भेजी गई। इसके बाद टेंडर प्रक्रिया शुरू हुई। टेंडर प्रक्रिया में देरी हुई। छह माह पहले किसी तरह से टेंडर हुआ। टेंडर मिलने वाली संस्था ने आकर रोडवेज का निरीक्षण किया पर अब तक रोडवेज का कायाकल्प शुरू नहीं हो सका है।