शारदीय नवरात्र मेला में लाखों श्रद्घालु देश के कोने कोन से मन में मनौती लेकर विंध्यधाम आते हैं। श्रद्धालु लक्ष्मी के सौम्य रूप मां विंध्यवासिनी का दर्शन करने के बाद काली खोह स्थित मां काली के रौद्र स्वरूप का दर्शन करते हैं। पहाड़ के ऊपर महा सरस्वती के रूप में विराजमान मां अष्टभुजा के दर्शन करने के दौरान रास्ते में पहाड़ पर लोग आशियाने की चाहत में पहाड़ पत्थरों के टुकड़ों से घरौंदा बनाते हैं।
मान्यता है कि पहाड़ पर सच्चे मन से जो भी भक्त पत्थर से घर बनाता है, उसे वैसे ही घर की प्राप्ति होती है। ऐसे में हर भक्त अपने हाथों से छोटे-छोटे पत्थरों को एकत्रित कर अपने सपनों का महल तैयार करता है। इस दौरान पहाड़ पर चारों ओर छोटे छोटे पत्थर के टुकड़ों से बनाये गए तरह तरह के घरौंदे दिखाई पड़ते हैं। कोई साधारण घर की चाहत में चारों तरफ पत्थर लगाने के बाद ऊपर से पत्थर रख कर घर बनाता है, तो सुंदर घर की चाहत में दो व तीन मंजिला आकर्षक घर बनाता है। घरौंदा बनाने के दौरान भक्त आशियाने की चाहत में पूरी श्रद्घा व भक्ति के साथ घर के सभी सदस्य मिल कर घरौंदा बनाते हैं। कभी कभी तो ऐसी स्थिति बन जाती है कि भक्तों को घर बनाने के लिए बड़ी मुश्किल से पत्थर के टुकड़ो को इकट्ठा करना पड़ता है। वर्ष के दोनों नवरात्र में श्रद्घालुओं की भीड़ पहाड़ पर घरौंदा बनाते देखी जा सकती है।